Saturday, February 14, 2026

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शिक्षकों की पदोन्नति पर हाईकोर्ट सख्त, 22 सितंबर तक वरिष्ठता सूची तैयार कर याचिकाकर्ताओं को दें: राज्य सरकार को आदेश

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने लंबे समय से लंबित पड़े एलटी शिक्षकों और प्रवक्ताओं की पदोन्नति मामले में राज्य सरकार को बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने निर्देश दिया है कि वरिष्ठता के आधार पर प्रमोशन लिस्ट तैयार की जाए और इसे 22 सितंबर तक याचिकाकर्ताओं को उपलब्ध कराया जाए।

खंडपीठ के समक्ष सुनवाई

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जी. नरेंदर और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने गुरुवार को इस मामले में एक साथ दाखिल कई याचिकाओं पर सुनवाई की। अदालत ने स्पष्ट कहा कि अब सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे ताकि वर्षों से लंबित पड़े शिक्षकों के प्रमोशन का मामला आगे बढ़ सके।

आंदोलन की चेतावनी के बाद तेज हुई सुनवाई

प्रदेश के करीब 5,000 शिक्षक लंबे समय से पदोन्नति की मांग कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने आंदोलन की चेतावनी दी थी, जिससे स्कूलों के बंद होने का खतरा पैदा हो गया। छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए राज्य सरकार ने मामले की शीघ्र सुनवाई की मांग करते हुए इसे अदालत में मेंशन किया।

महाधिवक्ता एस.एन. बाबुलकर और मुख्य स्थायी अधिवक्ता चंद्रशेखर रावत ने अदालत को बताया कि यह मामला 2012 से हाईकोर्ट में लंबित है। प्रमोशन और तबादले न होने से शिक्षकों में गहरा आक्रोश है। कई शिक्षक सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जिन्हें ग्रेच्युटी और पेंशन का लाभ मिल चुका है, लेकिन उन्हें समय पर प्रमोशन नहीं मिला।

शिक्षकों की मांग

शिक्षकों का कहना है कि प्रधानाचार्य पद की सीधी भर्ती को निरस्त कर इसे पदोन्नति से भरा जाए। वर्षों तक सेवा देने के बावजूद उन्हें इसका लाभ नहीं मिला है। उन्होंने यह भी मांग की कि उनकी पदोन्नति सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश—भुवन चंद्र कांडपाल केस—के आधार पर की जाए, जैसा कि अन्य मामलों में किया गया है।

दायर याचिकाएं

इस मामले में त्रिविक्रम सिंह, लक्ष्मण सिंह खाती सहित कई अन्य शिक्षकों ने याचिकाएं दायर की हैं। अदालत ने सभी याचिकाओं को एक साथ सुनते हुए सरकार को साफ निर्देश दिए कि निर्धारित समयसीमा के भीतर प्रमोशन सूची जारी की जाए।

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