Top 5 This Week

Related Posts

व्यवस्था की बदहाली: रुड़की के सरकारी स्कूल में चूल्हे पर पक रहा ‘मिड-डे मील’, गैस सिलिंडर के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे गुरुजी

रुड़की (17 मार्च, 2026): एक ओर जहाँ सरकार ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘उज्ज्वला योजना’ के जरिए आधुनिकता के दावे कर रही है, वहीं रुड़की के एक सरकारी स्कूल से हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है। यहाँ नौनिहालों के लिए दोपहर का भोजन (मिड-डे मील) गैस के बजाय लकड़ी के पारंपरिक चूल्हे पर पकाया जा रहा है। स्कूल में गैस सिलिंडर खत्म होने के कारण रसोइयों को धुएं के बीच खाना बनाने को मजबूर होना पड़ रहा है, जबकि स्कूल के प्रधानाध्यापक (हेडमास्टर) सिलिंडर रिफिल कराने के लिए गैस एजेंसियों और संबंधित विभागों की दौड़ लगा रहे हैं।

धुएं के बीच पक रहा बच्चों का भविष्य

रुड़की ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले इस प्राथमिक विद्यालय में पिछले कुछ दिनों से भोजन पकाने की व्यवस्था पटरी से उतर गई है:

  • खत्म हुई गैस: स्कूल को आवंटित गैस सिलिंडर खाली हो चुका है, जिसके बाद वैकल्पिक व्यवस्था न होने पर रसोइयों ने स्कूल परिसर में ही पत्थरों का चूल्हा बना लिया है।
  • स्वास्थ्य पर खतरा: लकड़ियां जलाकर खाना पकाने से उठने वाला धुआं न केवल रसोइयों के लिए हानिकारक साबित हो रहा है, बल्कि पास की कक्षाओं में पढ़ रहे बच्चों की आंखों और फेफड़ों पर भी बुरा असर डाल रहा है।
  • समय की बर्बादी: रसोइयों का कहना है कि लकड़ी जुटाने और चूल्हा सुलगाने में काफी समय नष्ट हो जाता है, जिससे अक्सर बच्चों को मिलने वाला भोजन देरी से तैयार होता है।

एजेंसियों के चक्कर काट रहे प्रधानाध्यापक

हैरानी की बात यह है कि संसाधन होने के बावजूद तकनीकी या प्रशासनिक खामियों के चलते रिफिल नहीं मिल पा रहा है:

  1. हेडमास्टर की बेबसी: स्कूल के प्रधानाध्यापक का कहना है कि वे कई बार गैस एजेंसी के चक्कर काट चुके हैं। कभी सर्वर डाउन होने तो कभी स्टॉक की कमी का हवाला देकर उन्हें वापस भेज दिया जाता है।
  2. कागजी कार्रवाई का बोझ: नियमों की पेचीदगियों और आधार लिंकिंग जैसी समस्याओं के कारण स्कूल के खाते से गैस बुकिंग में बाधा आ रही है, जिसका समाधान अब तक नहीं निकल सका है।
  3. जेब से खर्च करने को मजबूर: सूत्रों के अनुसार, कई बार शिक्षक अपनी जेब से पैसे भरकर निजी तौर पर व्यवस्था करते हैं, लेकिन लंबे समय तक ऐसा करना उनके लिए संभव नहीं है।

शिक्षा विभाग के दावों की खुली पोल

यह मामला शिक्षा विभाग के उन दावों पर सवालिया निशान लगाता है जिनमें स्कूलों को सभी आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की बात कही जाती है:

  • ग्रामीणों में रोष: बच्चों के अभिभावकों और स्थानीय ग्रामीणों ने इस स्थिति पर गहरा रोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि अगर स्कूल में गैस जैसी मूलभूत सुविधा नहीं मिल पा रही है, तो अन्य दावों का क्या आधार है।

अधिकारियों की चुप्पी: इस मामले में जब संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने जांच के बाद उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

Popular Articles