Saturday, January 31, 2026

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वैश्विक ‘हेल्थ हब’ बना भारत: दुनिया के टॉप-5 मेडिकल टूरिज्म देशों में मिली जगह; हर साल 20 लाख विदेशी नागरिक भारत में करा रहे हैं इलाज

नई दिल्ली: भारतीय स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र ने वैश्विक मानचित्र पर अपनी एक मजबूत पहचान बनाई है। एक हालिया अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब दुनिया के उन शीर्ष पांच देशों में शामिल हो गया है जिन्हें विदेशी मरीज इलाज के लिए सबसे ज्यादा पसंद करते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, हर साल 20 लाख से अधिक विदेशी नागरिक अपनी गंभीर बीमारियों के उपचार, जटिल सर्जरी और वेलनेस थेरेपी के लिए भारत का रुख कर रहे हैं। विश्व स्तरीय अस्पतालों, अनुभवी डॉक्टरों और पश्चिमी देशों की तुलना में काफी कम खर्च ने भारत को ‘मेडिकल टूरिज्म’ का एक प्रमुख केंद्र बना दिया है। सरकार की ‘हीली इन इंडिया’ (Heal in India) पहल ने इस क्षेत्र को नई ऊर्जा दी है, जिससे न केवल देश का राजस्व बढ़ रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ भी मजबूत हो रही है।

भारत क्यों बन रहा है विदेशी मरीजों की पहली पसंद?

विदेशी मरीजों के भारत आने के पीछे कई महत्वपूर्ण कारक काम कर रहे हैं:

  • किफायती उपचार: अमेरिका और यूरोप की तुलना में भारत में जटिल सर्जरी (जैसे हार्ट बाईपास या नी-रिप्लेसमेंट) का खर्च 60 से 80 प्रतिशत तक कम है।
  • विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा: भारत में बड़ी संख्या में JCI (Joint Commission International) प्रमाणित अस्पताल हैं, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्रदान करते हैं।
  • तकनीकी श्रेष्ठता: भारतीय अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी, साइबर नाइफ और उन्नत अंग प्रत्यारोपण जैसी अत्याधुनिक तकनीकें उपलब्ध हैं।
  • कुशल चिकित्सा विशेषज्ञ: भारतीय डॉक्टरों की गिनती दुनिया के सबसे अनुभवी और प्रतिभाशाली विशेषज्ञों में होती है, जो जटिल से जटिल केस सुलझाने के लिए जाने जाते हैं।

 

प्रमुख देश और उपचार के क्षेत्र

भारत में मुख्य रूप से खाड़ी देशों, सार्क (SAARC) देशों, अफ्रीका और यहां तक कि अमेरिका-कनाडा से भी मरीज पहुँच रहे हैं:

उपचार का क्षेत्र मुख्य आकर्षण
कार्डियोलॉजी हार्ट बाईपास, वॉल्व रिप्लेसमेंट और पेडियाट्रिक हार्ट सर्जरी।
ऑर्थोपेडिक्स घुटना और कूल्हा प्रत्यारोपण (Joint Replacement)।
ऑन्कोलॉजी कैंसर का सटीक इलाज और इम्यूनोथेरेपी।
आयुष और वेलनेस आयुर्वेद, योग और पंचकर्म के जरिए पारंपरिक उपचार।
अंग प्रत्यारोपण लिवर और किडनी ट्रांसप्लांट में भारत की सफलता दर वैश्विक स्तर पर बहुत ऊँची है।

 

अर्थव्यवस्था और रोजगार पर प्रभाव

मेडिकल टूरिज्म न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र, बल्कि अन्य उद्योगों को भी गति दे रहा है:

  1. विदेशी मुद्रा का प्रवाह: हर साल मेडिकल टूरिज्म से भारत को अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा प्राप्त हो रही है, जिससे देश की जीडीपी को मजबूती मिल रही है।
  2. होटल और विमानन क्षेत्र: मरीजों के साथ आने वाले परिजनों के कारण पर्यटन, होटल और एयरलाइंस उद्योग में मांग बढ़ी है।
  3. रोजगार सृजन: इस क्षेत्र के विस्तार से पैरामेडिकल स्टाफ, अनुवादक (Translators) और लॉजिस्टिक सेक्टर में लाखों नए रोजगार पैदा हुए हैं।

निष्कर्ष: ‘विश्व गुरु’ बनने की ओर कदम

भारत का टॉप-5 में शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि देश अब केवल जेनेरिक दवाओं का सप्लायर नहीं, बल्कि उच्च-स्तरीय चिकित्सा सेवाओं का प्रदाता भी बन गया है। सरकार द्वारा ‘मेडिकल वीजा’ की प्रक्रियाओं को सरल बनाना और ‘आयुष वीजा’ की शुरुआत करना इस क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित हुआ है। यदि बुनियादी ढांचे में इसी तरह सुधार जारी रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब भारत दुनिया का नंबर-1 मेडिकल टूरिज्म डेस्टिनेशन होगा।

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