नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सोमवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) के प्रमुखों और वित्तीय संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक करेंगी। बैठक में विदेशी मुद्रा जमा जुटाने के अभियान (Forex Deposit Mobilisation Drive) की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।
बैठक का मुख्य एजेंडा विदेशी मुद्रा अनिवासी बैंक जमा (FCNR-B), ओवरसीज फॉरेन करेंसी बॉन्ड और बाहरी वाणिज्यिक उधारी (ECB) से जुड़े मुद्दों की समीक्षा करना होगा। सरकार और बैंकिंग क्षेत्र इस पहल के जरिए देश में विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में विदेशी मुद्रा जमा को बढ़ावा देने के लिए कुछ विशेष उपायों की घोषणा की थी। इसके तहत 3 से 5 वर्ष की अवधि वाले नए FCNR(B) जमा पर ब्याज दर की सीमा को 30 सितंबर 2026 तक हटाया गया है। इससे बैंकों को विदेशी जमाकर्ताओं को अधिक प्रतिस्पर्धी ब्याज दरें देने में मदद मिलेगी।
RBI ने बैंकों के लिए विदेशी मुद्रा जोखिम प्रबंधन की लागत कम करने के उद्देश्य से रियायती विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा भी उपलब्ध कराई है। इस कदम से बैंकों को एनआरआई, ओसीआई और भारतीय मूल के लोगों (PIO) से विदेशी मुद्रा जमा आकर्षित करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
विदेशी मुद्रा जमा में गिरावट को देखते हुए यह अभियान शुरू किया गया है। आंकड़ों के अनुसार, FCNR(B) जमा में शुद्ध प्रवाह वित्त वर्ष 2025 के 7.1 अरब डॉलर से घटकर वित्त वर्ष 2026 में 946 मिलियन डॉलर रह गया है।
बैठक में यह भी आकलन किया जाएगा कि बैंकों ने RBI के प्रोत्साहन उपायों पर किस तरह प्रतिक्रिया दी है और विदेशी पूंजी जुटाने की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने के लिए किन कदमों की जरूरत है। इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की विदेशी उधारी योजनाओं पर भी चर्चा होने की संभावना है।
सरकार का उद्देश्य विदेशी मुद्रा भंडार और वित्तीय प्रणाली में स्थिरता को मजबूत करना है। बैंकिंग क्षेत्र के साथ समन्वय कर विदेशी मुद्रा संसाधनों को बढ़ाने की दिशा में यह समीक्षा बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है।





