Saturday, February 14, 2026

Top 5 This Week

Related Posts

विकास के लिए पर्यावरण की ‘बलि’: नैनीताल रोड के चौड़ीकरण की राह में कटेंगे 17,400 पेड़; नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने वन विभाग से मांगी अनुमति

हल्द्वानी/नैनीताल: कुमाऊं के प्रवेश द्वार हल्द्वानी से नैनीताल को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग (नैनीताल रोड) के चौड़ीकरण की योजना ने पर्यावरण प्रेमियों की चिंता बढ़ा दी है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस सड़क को फोरलेन/टू-लेन विद पेव्ड शोल्डर बनाने के लिए मार्ग में आने वाले 17,400 पेड़ों को काटने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस विशालकाय संख्या में पेड़ों के पातन (Felling) के लिए एनएच ने वन विभाग को औपचारिक आवेदन भेजकर अनुमति मांगी है। जहाँ एक ओर प्रशासन इसे पर्यटन और सुगम यातायात के लिए अनिवार्य कदम बता रहा है, वहीं दूसरी ओर इतनी बड़ी संख्या में हरे-भरे पेड़ों के कटान को लेकर विरोध के स्वर भी उठने लगे हैं।

क्यों जरूरी है सड़क का चौड़ीकरण?

नेशनल हाईवे अथॉरिटी के अनुसार, नैनीताल जाने वाले पर्यटकों और स्थानीय निवासियों की बढ़ती संख्या के कारण वर्तमान मार्ग अब नाकाफी साबित हो रहा है:

  • जाम की समस्या: वीकेंड और पीक टूरिस्ट सीजन में हल्द्वानी से काठगोदाम और नैनीताल के बीच घंटों लंबा जाम लगता है, जिससे एम्बुलेंस और आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित होती हैं।
  • कनेक्टिविटी में सुधार: चौड़ीकरण के बाद यात्रा के समय में करीब 30 से 45 मिनट की कमी आने का अनुमान है।
  • आर्थिक लाभ: बेहतर सड़कें पर्यटन कारोबार को गति देंगी और स्थानीय होमस्टे व होटल व्यवसायियों की आय में वृद्धि होगी।

पर्यावरणीय प्रभाव और वन विभाग की भूमिका

इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों का काटा जाना नैनीताल के संवेदनशील ईको-सिस्टम के लिए बड़ा खतरा माना जा रहा है:

  1. पेड़ों की प्रजातियां: काटे जाने वाले पेड़ों में साल, शीशम, सागौन और बांज जैसे महत्वपूर्ण वृक्ष शामिल हैं, जो इस क्षेत्र की जैव विविधता (Biodiversity) का आधार हैं।
  2. मिट्टी का कटाव: पर्यावरण विशेषज्ञों का तर्क है कि पहाड़ों पर इतने अधिक पेड़ कटने से भूस्खलन (Landslides) और मिट्टी के कटाव का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा।
  3. नियम और शर्तें: वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रस्ताव मिला है, लेकिन अनुमति देने से पहले पर्यावरणीय क्षति और उसके बदले किए जाने वाले ‘प्रतिपूरक वनीकरण’ (Compensatory Afforestation) की योजना की गहन जांच की जाएगी।

विरोध और जनभावना

जैसे ही यह खबर सार्वजनिक हुई, नैनीताल और हल्द्वानी के स्थानीय निवासियों व पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर अभियान शुरू कर दिया है। लोगों का कहना है कि विकास के नाम पर पहाड़ों को नग्न करना भविष्य में ‘जोशीमठ’ जैसी आपदाओं को आमंत्रण देना है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सड़क के डिजाइन में बदलाव किया जाए ताकि कम से कम पेड़ों को काटना पड़े।

निष्कर्ष: संतुलन की तलाश

नैनीताल रोड का चौड़ीकरण जहाँ एक ओर विकास की मजबूरी है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण की रक्षा एक नैतिक जिम्मेदारी है। अब गेंद राज्य सरकार और वन विभाग के पाले में है कि वे किस प्रकार विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बिठाते हैं। यदि अनुमति मिलती है, तो यह कुमाऊं के सबसे बड़े वृक्ष कटान अभियानों में से एक होगा।

Popular Articles