Saturday, July 27, 2024

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विकसित भारत संकल्प यात्रा के अंतर्गत 2.61 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाए गए

संपूर्ण देश में जारी विकसित भारत संकल्प यात्रा में दी गई सुविधाओं और जानकारियों से ग्राम पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों में अब तक 5,19,35,933 लोग लाभान्वित हुए हैं और 1,99,199 स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए हैं।

विकसित भारत संकल्प यात्रा के लिए स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्रालय की प्रमुख योजना के अंतर्गत आयुष्मान ऐप का उपयोग करके आयुष्मान कार्ड बनाए जा रहे हैं और लाभार्थियों को कार्ड वितरित किए जा रहे हैं। अब तक 48,96,774 कार्ड बांटे जा चुके हैं।

कल आयोजित स्वास्थ्य शिविरों में कुल 4,51,492 आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं। अब तक कुल मिलाकर 2,61,11,405 कार्ड बनाए जा चुके हैं।

क्षय रोग (टीबी): टीबी के रोगियों के लक्षणों को देखकर उनकी जांच, बलगम परीक्षण और जिन स्‍थानों पर न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्ट (एनएएटी) मशीने उपलब्‍ध हैं वहां इनका उपयोग करके जांच की जाती है। जिन मामलों में तपेदिक का संदेह होता है उन्हें उच्च सुविधाओं के लिए रेफर किया जाता है। विकसित भारत संकल्‍प यात्रा के 65वें दिन तक, 2,62,05,700 से अधिक लोगों की जांच की गई, जिनमें से 9,93,800 से अधिक को उच्च सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए रेफर किया गया।

प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान (पीएमटीबीएमए) के अंतर्गत टीबी से पीड़ित रोगियों को निक्षय मित्रों से सहायता प्राप्त करने के लिए सहमति ली जा रही है। निक्षय मित्र बनने के इच्छुक प्रतिभागियों का ऑन-स्पॉट पंजीकरण भी किया जा रहा है। पीएमटीबीएमबीए के अंतर्गत 3,62,700 से अधिक रोगियों ने सहमति दी है और 99,100 से अधिक नए निक्षय मित्र पंजीकृत किए गए हैं।

निक्षय पोषण योजना (एनपीवाई) के तहत तपेदिक रोगियों को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इस उद्देश्य से लंबित लाभार्थियों के बैंक खाते का विवरण एकत्र किया जा रहा है और खातों को आधार संख्‍या से जोड़ा जा रहा है। ऐसे 69,300 लाभार्थियों का विवरण एकत्र किया गया है।

सिकल सेल रोग: प्रमुख आदिवासी आबादी वाले क्षेत्रों में सिकल सेल रोग के लिए प्वाइंट ऑफ केयर (पीओसी) परीक्षणों के माध्यम से या विलेयता परीक्षण: कार्बन टेट्राक्लोराइड (साल्यबिलिटी) परीक्षण के माध्यम से सिकल सेल रोग (एससीडी) का पता लगाने के लिए पात्र आबादी (40 वर्ष तक की आयु) की जांच की जा रही है। बीमारी का पता लगने पर आगे इलाज के लिए उच्च स्‍वास्‍थ्‍य केंद्रों पर भेजा जा रहा है। अब तक 31,34,600 से अधिक लोगों की जांच की जा चुकी है, जिनमें से 60,900 रोगियों का पता चला है और उन्हें उच्च सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए भेजा गया।

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