देहरादून/राज्य ब्यूरो: उत्तराखंड सरकार ने जंगली जानवरों के हमले में घायल होने वाले नागरिकों के लिए उपचार सहायता राशि में भारी बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर अब वन्यजीव संघर्ष में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति के इलाज के लिए सरकार ₹15 लाख तक का खर्च वहन करेगी। वर्तमान में यह सीमा बेहद कम है, जिससे दुर्गम क्षेत्रों के निर्धन परिवारों को इलाज के लिए भारी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता था। शासन स्तर पर इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिल गई है और जल्द ही इसका आधिकारिक शासनादेश (GO) जारी कर दिया जाएगा।
अब तक क्या थी व्यवस्था और क्यों पड़ी बदलाव की जरूरत?
राज्य में बाघ, गुलदार (तेंदुआ), हाथी और भालू के हमलों में घायल होने वाले लोगों को अब तक सीमित मुआवजा और चिकित्सा सहायता दी जाती थी।
- सीमित सहायता: अब तक की व्यवस्था में गंभीर रूप से घायलों को मिलने वाली राशि अस्पताल के बड़े खर्चों, जैसे सर्जरी और लंबे समय तक चलने वाले उपचार के लिए अपर्याप्त साबित हो रही थी।
- इलाज में देरी: कई बार आर्थिक तंगी के कारण परिजन घायलों को निजी या बड़े सरकारी अस्पतालों में ले जाने से कतराते थे, जिससे जान का जोखिम बढ़ जाता था।
नई नीति की मुख्य विशेषताएं
सरकार द्वारा प्रस्तावित नई व्यवस्था के तहत घायलों को मिलने वाली राहत का दायरा काफी बढ़ा दिया गया है:
- इलाज का पूरा खर्च: यदि हमले में कोई व्यक्ति गंभीर रूप से घायल होता है, तो उसके इलाज पर होने वाला वास्तविक खर्च (अधिकतम ₹15 लाख तक) सरकार द्वारा दिया जाएगा।
- पैनल अस्पतालों में सुविधा: राज्य के प्रमुख सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में भी कैशलेस या प्रतिपूर्ति (Reimbursement) के आधार पर इलाज की सुविधा मिल सकेगी।
- त्वरित सहायता: वन विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि घटना के तुरंत बाद घायल को प्राथमिक चिकित्सा और अस्पताल पहुंचाने के लिए ‘इमरजेंसी फंड’ से तत्काल सहायता राशि जारी की जाए।
मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने पर भी जोर
केवल इलाज ही नहीं, बल्कि सरकार इन हमलों को रोकने के लिए भी कई मोर्चों पर काम कर रही है:
- सोलर फेंसिंग और दीवारें: संवेदनशील गांवों के चारों ओर सोलर फेंसिंग और कंक्रीट की दीवारें बनाने का काम तेज किया गया है।
- त्वरित प्रतिक्रिया टीम (QRT): प्रत्येक रेंज में विशेष टीमों का गठन किया गया है जो सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर जंगली जानवर को रिहायशी इलाकों से खदेड़ने का काम करेंगी।
- मुआवजे में पारदर्शिता: अनुग्रह राशि (Ex-gratia) के भुगतान के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है ताकि पीड़ितों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
निष्कर्ष: जनहित में सरकार का बड़ा कदम
पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ते गुलदार और हाथियों के हमलों के बीच, ₹15 लाख तक के इलाज की यह घोषणा राज्यवासियों के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच साबित होगी। मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया है कि “राज्य के नागरिकों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और वन्यजीवों के साथ संघर्ष की स्थिति में हम अपने लोगों को अकेला नहीं छोड़ेंगे।”





