भोपाल (19 मार्च, 2026): मध्य प्रदेश के इतिहास में आज का दिन ‘स्वर्ण अक्षरों’ में दर्ज हो गया है। लगभग चार दशकों से प्रदेश के आदिवासी अंचलों और घने जंगलों में पैर पसारे ‘लाल आतंक’ (माओवाद) का आधिकारिक तौर पर अंत हो गया है। राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय ने संयुक्त रूप से घोषणा की है कि मध्य प्रदेश अब पूरी तरह से नक्सल मुक्त हो गया है। 38 वर्षों तक मासूमों के खून और दहशत की पटकथा लिखने वाले इस नेटवर्क को सुरक्षाबलों ने अपने ‘अंतिम प्रहार’ (Final Assault) के जरिए नेस्तनाबूद कर दिया है।
38 साल का खूनी इतिहास: दहशत से शांति तक का सफर
मध्य प्रदेश (जो साल 2000 तक छत्तीसगढ़ के साथ संयुक्त था) में नक्सलवाद की जड़ें 1980 के दशक के उत्तरार्ध में जमनी शुरू हुई थीं:
- दहशत का केंद्र: बालाघाट, मंडला और डिंडोरी जैसे जिले ‘नक्सल कॉरिडोर’ का हिस्सा थे। यहाँ माओवादियों ने समानांतर सरकार चलाने की कोशिश की और दर्जनों पुलिसकर्मियों व निर्दोष ग्रामीणों की हत्या की।
- विकास में बाधा: इन क्षेत्रों में नक्सलियों ने दशकों तक सड़कों, स्कूलों और मोबाइल टावरों के निर्माण को रोककर रखा, जिससे आदिवासी समुदाय मुख्यधारा से कटा रहा।
‘ऑपरेशन क्लीन स्वीप’: कैसे मिली यह ऐतिहासिक जीत?
इस खौफनाक दौर को खत्म करने के लिए पिछले कुछ वर्षों में एक बहुआयामी रणनीति अपनाई गई:
- हॉक फोर्स की घातक स्ट्राइक: मध्य प्रदेश पुलिस की विशिष्ट ‘हॉक फोर्स’ ने नक्सलियों के गढ़ में घुसकर उनके शीर्ष कमांडरों को या तो ढेर किया या उन्हें आत्मसमर्पण के लिए मजबूर कर दिया।
- सूचना तंत्र और घेराबंदी: छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की सीमाओं पर ‘इंटर-स्टेट कोऑर्डिनेशन’ को मजबूत किया गया, जिससे नक्सलियों के भागने के रास्ते बंद हो गए।
- विकास का प्रहार: ‘पुलिस की पाठशाला’ और ‘सड़क से समाधान’ जैसी योजनाओं के जरिए जंगलों तक विकास पहुँचाया गया, जिससे नक्सलियों का स्थानीय आधार खत्म हो गया।
अंतिम प्रहार: बड़े इनामी नक्सलियों का सफाया
पिछले एक साल में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान:
- शीर्ष नेतृत्व ध्वस्त: कान्हा-भोरमदेव और विस्तार दलम जैसे खतरनाक गुटों के सभी सक्रिय सदस्यों को पकड़ लिया गया है।
- हथियारों की बरामदगी: भारी मात्रा में आईईडी (IED), आधुनिक राइफलें और नक्सली साहित्य जब्त किया गया है। अब प्रदेश के किसी भी क्षेत्र में कोई ‘सक्रिय दलम’ (नक्सली दस्ता) मौजूद नहीं है।
मुख्यमंत्री का संदेश: “नया सवेरा, निर्भय मध्य प्रदेश”
इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता और विशेषकर सुरक्षाबलों को बधाई दी है:
“यह जीत उन शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि है जिन्होंने लाल आतंक से लड़ते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। अब हमारे आदिवासी भाई-बहन बिना किसी डर के विकास की मुख्यधारा से जुड़ेंगे। मध्य प्रदेश की धरती पर अब बंदूक की नहीं, प्रगति की गूंज होगी।”





