गांधीनगर: गुजरात की भूपेंद्र पटेल सरकार ने राज्य में प्रेम विवाह (Love Marriage) के नियमों को और अधिक कड़ा बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। सरकार ने एक नया ‘मैरिज ड्राफ्ट’ पेश किया है, जिसके तहत अब प्रेम विवाह करने वाले जोड़ों के लिए अपने माता-पिता की लिखित सहमति और उसी इलाके के दो स्थानीय गवाहों के हस्ताक्षर अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। माना जा रहा है कि यह कदम राज्य में ‘लव जिहाद’ की बढ़ती घटनाओं को रोकने और भागकर शादी करने के कारण परिवारों में होने वाले बिखराव को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
नए ड्राफ्ट की मुख्य शर्तें: क्या बदलेगा?
गुजरात सरकार द्वारा प्रस्तावित इस नए पंजीकरण नियम में तीन प्रमुख बदलाव किए गए हैं:
- माता-पिता की अनिवार्य सहमति: यदि कोई जोड़ा प्रेम विवाह करना चाहता है, तो पंजीकरण के समय कम से कम एक अभिभावक (माता या पिता) की लिखित मंजूरी आवश्यक होगी।
- स्थानीय गवाहों की अनिवार्यता: शादी के गवाह अब कोई भी मित्र या अनजान व्यक्ति नहीं हो सकेंगे। गवाह उसी स्थानीय क्षेत्र (तालुका या जिले) के होने चाहिए जहाँ जोड़ा निवास करता है।
- पंजीकरण प्रक्रिया में पारदर्शिता: विवाह रजिस्ट्रार को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित पक्षों के परिवारों को इस विवाह की सूचना दी गई है।
क्यों पड़ी इस सख्त कानून की जरूरत?
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस प्रस्ताव के पीछे कई सामाजिक और कानूनी कारण गिनाए हैं:
- लव जिहाद और धोखाधड़ी पर रोक: सरकार का मानना है कि कई मामलों में पहचान छिपाकर या बहला-फुसलाकर लड़कियों का धर्मांतरण कराया जाता है। माता-पिता की सहमति से ऐसी घटनाओं पर लगाम लगेगी।
- पारिवारिक कलह और अपराध: पुलिस रिपोर्टों के अनुसार, भागकर की गई शादियों के बाद अक्सर हत्या, अपहरण और आत्महत्या जैसी घटनाएं सामने आती हैं। स्थानीय गवाहों के होने से जांच और सत्यापन आसान हो जाएगा।
- पाटीदार समाज की मांग: गुजरात के कई प्रमुख संगठनों, विशेषकर पाटीदार समाज ने लंबे समय से मांग की थी कि बेटियों को सुरक्षा देने के लिए प्रेम विवाह में माता-पिता की अनुमति अनिवार्य की जाए।
विपक्ष और नागरिक समाज की प्रतिक्रिया
इस ड्राफ्ट के पेश होते ही राज्य में बहस छिड़ गई है:
- समर्थन: भाजपा और कई हिंदू संगठनों ने इसे ‘संस्कारों की रक्षा’ और ‘बेटियों की सुरक्षा’ के लिए जरूरी बताया है। उनका तर्क है कि इससे अदालती शादियों में होने वाली धांधली रुकेगी।
- विरोध: वहीं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और कुछ विपक्षी नेताओं ने इसे ‘व्यक्तिगत स्वतंत्रता’ का हनन बताया है। उनका कहना है कि संविधान के अनुसार, दो बालिग व्यक्ति अपनी मर्जी से जीवनसाथी चुनने के लिए स्वतंत्र हैं और माता-पिता की सहमति की शर्त सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के विपरीत हो सकती है।
कानूनी प्रक्रिया और आगे का रास्ता
सरकार इस ड्राफ्ट को कानूनी रूप देने के लिए विधानसभा में विधेयक ला सकती है। हालांकि, अधिकारी वर्तमान में इस बात का अध्ययन कर रहे हैं कि यह नियम हिंदू मैरिज एक्ट और स्पेशल मैरिज एक्ट के केंद्रीय प्रावधानों के साथ कैसे तालमेल बिठाएगा। यदि यह कानून लागू होता है, तो गुजरात ऐसा नियम बनाने वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा।





