Sunday, February 8, 2026

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रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का बयान — “रेलवे को 50 साल तक नजरअंदाज किया गया, अब हो रहा है ऐतिहासिक परिवर्तन”

नई दिल्ली। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि भारतीय रेलवे को दशकों तक उपेक्षित रखा गया, लेकिन अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में रेल नेटवर्क में ऐतिहासिक बदलाव किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि “पिछले पचास वर्षों में रेलवे को जिस तरह नजरअंदाज किया गया, उसकी भरपाई अब तेजी से हो रही है।”

रेल मंत्री सोमवार को राजधानी में आयोजित एक कार्यक्रम में रेलवे के आधुनिकीकरण और बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़ी योजनाओं पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि बीते दस वर्षों में रेलवे को देश की विकास यात्रा का प्रमुख इंजन बना दिया गया है।

पहले मरम्मत नहीं, अब परिवर्तन की सोच”
वैष्णव ने कहा कि पहले रेलवे में मरम्मत और तात्कालिक सुधार तक सीमित दृष्टिकोण अपनाया जाता था, लेकिन अब दीर्घकालिक योजना और तकनीकी उन्नयन पर ध्यान दिया जा रहा है। “पिछले 50 सालों में रेलवे की पटरियों, स्टेशनों और सिग्नलिंग सिस्टम पर जितना निवेश होना चाहिए था, उतना नहीं हुआ। अब हम एक ऐसा ढांचा बना रहे हैं जो अगले कई दशकों तक देश की जरूरतें पूरी करेगा,” उन्होंने कहा।

वंदे भारत और स्टेशन पुनर्विकास से बदली तस्वीर
रेल मंत्री ने बताया कि रेलवे में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव वंदे भारत ट्रेनों और स्टेशन पुनर्विकास परियोजनाओं के रूप में देखने को मिल रहा है। “वंदे भारत ट्रेनें देश की इंजीनियरिंग क्षमता और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का प्रतीक हैं। पहले जहां स्टेशनों की स्थिति दयनीय थी, अब उन्हें विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस किया जा रहा है,” उन्होंने कहा।

उन्होंने यह भी बताया कि देशभर में 1300 से अधिक स्टेशनों का पुनर्विकास कार्य चल रहा है, जिसमें आधुनिक सुविधाएं, डिजिटल सूचना प्रणाली, एस्केलेटर, लिफ्ट और यात्रियों की सुरक्षा के लिए उन्नत तकनीक शामिल की जा रही है।

सुरक्षा और गति पर फोकस
वैष्णव ने कहा कि रेलवे में अब प्राथमिकता सुरक्षा और गति दोनों पर है। “कवच” जैसी स्वदेशी तकनीक से दुर्घटनाओं में कमी आई है। आने वाले समय में ट्रेनों की औसत गति में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि “रेलवे अब सिर्फ यात्रा का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विकास की रीढ़ बन चुका है।”

भविष्य की दिशा
रेल मंत्री ने कहा कि रेलवे का विजन आने वाले 25 वर्षों पर केंद्रित है। “हम सिर्फ पटरियां नहीं बिछा रहे, बल्कि एक ऐसी रेल प्रणाली तैयार कर रहे हैं जो डिजिटल, हरित और विश्वस्तरीय होगी। यह परिवर्तन भारत की प्रगति की नई कहानी लिखेगा।”

 

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