मॉस्को: यूक्रेनी ड्रोन हमलों के कारण रूस की तेल शोधन (रिफाइनिंग) क्षमता में गंभीर गिरावट आई है, जिससे देश के प्रमुख बंदरगाहों से ईंधन के निर्यात पर भी असर पड़ा है। इस स्थिति के बीच रूस ने डीजल और पेट्रोल के निर्यात पर आंशिक प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है, जो साल के अंत तक लागू रहेगा।
प्रतिबंधों की प्रमुख बातें
- डीजल निर्यात: नए प्रतिबंध मुख्य रूप से बिचौलियों पर लागू होंगे, जबकि उत्पादक सीधे पाइपलाइन के माध्यम से डीजल का निर्यात जारी रख सकेंगे।
- पेट्रोल निर्यात: यह प्रतिबंध उत्पादकों और बिचौलियों दोनों पर लागू होगा, लेकिन रूस के अंतर-सरकारी समझौतों पर लागू नहीं होगा।
- प्रतिबंध का उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की आपूर्ति बढ़ाना बताया गया है।
रूसी अधिकारियों की प्रतिक्रिया
उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने गुरुवार को कहा कि देश में तेल उत्पादों की कमी है और मौजूदा भंडार से पूरी मांग को पूरा नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेट्रोल निर्यात पर प्रतिबंध साल के अंत तक बढ़ाया जाएगा।
क्रीमिया के प्रमुख सर्गेई अक्स्योनोव ने भी बताया कि ईंधन की आपूर्ति में बाधा रिफाइनरियों के बंद होने के कारण आ रही है।
उत्पादन और निर्यात का हाल
- 2024 में रूस ने लगभग 86 मिलियन मीट्रिक टन डीजल का उत्पादन किया, जिसमें से करीब 31 मिलियन टन का निर्यात हुआ।
- समुद्री मार्ग से डीजल निर्यात करने वाले देशों में रूस और अमेरिका शीर्ष पर हैं।
- पेट्रोल के निर्यात पर लगाया गया प्रतिबंध देश के प्रमुख उत्पादकों और बिचौलियों दोनों पर प्रभाव डालेगा।
घरेलू स्थिति और बाजार पर असर
रूस में ईंधन की कमी तेजी से बढ़ रही है। रिपोर्टों के अनुसार, देश की दूसरी सबसे बड़ी तेल कंपनी लुकोइल ने मॉस्को के कुछ पेट्रोल पंपों पर जैरी कैन (डिब्बे) में पेट्रोल बिक्री पर रोक लगा दी है।
विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम ऐसे समय में आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस से तेल की खरीद पर आपत्ति जता रहे हैं।





