मास्को/नई नई दिल्ली (24 मार्च, 2026): भारत और रूस के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को एक नए और ऐतिहासिक स्तर पर ले जाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही रूस की यात्रा पर जाएंगे। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने मास्को में आयोजित “इंडिया एंड रशिया: टुवर्ड्स ए न्यू बाइलेटरल एजेंडा” सम्मेलन को संबोधित करते हुए इस महत्वपूर्ण यात्रा की घोषणा की। यह सम्मेलन रूसी इंटरनेशनल अफेयर्स काउंसिल और भारत के मास्को स्थित दूतावास द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था, जिसे भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और लावरोव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया। दिसंबर 2025 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के बाद, प्रधानमंत्री मोदी की यह रूस यात्रा दोनों देशों के बीच सहयोग के नए क्षेत्रों को खोलने और द्विपक्षीय व्यापार को सौ अरब डॉलर तक पहुँचाने के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक कदम मानी जा रही है।
प्रमुख पहल: भारत-रूस द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने पर जोर
भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने के पीछे दोनों देशों का विजन और रणनीति:
- रणनीतिक साझेदारी: भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी की रूस यात्रा एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम है। दोनों देशों ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा करने और सहयोग करने की प्रतिबद्धता जताई है।
- आर्थिक सहयोग: भारत और रूस ने द्विपक्षीय व्यापार को सौ अरब डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है, जिसे हासिल करने के लिए दोनों देशों ने व्यापार और निवेश के नए क्षेत्रों को खोलने पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री मोदी की रूस यात्रा से दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।
सर्गेई लावरोव का संबोधन: प्रधानमंत्री मोदी की रूस यात्रा और सहयोग के नए क्षेत्र
रूसी विदेश मंत्री लावरोव ने “इंडिया एंड रशिया: टुवर्ड्स ए न्यू बाइलेटरल एजेंडा” सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी की रूस यात्रा और सहयोग के नए क्षेत्रों पर प्रकाश डाला:
“हम प्रधानमंत्री मोदी की रूस यात्रा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। यह यात्रा भारत-रूस द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक गहराई देने और सहयोग के नए क्षेत्रों को खोलने में एक बड़ी भूमिका निभाएगी। हम भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाने और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा करने के लिए पूरी तरह समर्पित हैं। पश्चिम एशिया संकट के बीच, भारत और रूस का सहयोग क्षेत्र में शांति और स्थिरता को सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।”





