रुड़की में वर्ष 2012 में निर्माणाधीन पुल गिरने से तीन श्रमिकों की मौत के मामले में न्यायालय ने तेरह साल बाद बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट शिवानी नाहर की अदालत ने पांच अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए उन्हें दो-दो वर्ष का सश्रम कारावास और 10-10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न देने पर दोषियों को एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
हादसा और आरोप
यह मामला 4 फरवरी 2012 का है। सुबह करीब 9:40 बजे नगर पालिका के समीप गंगनहर पर बन रहा निर्माणाधीन पैदल पुल अचानक ध्वस्त होकर गंगनहर में समा गया था। हादसे में पुल पर कार्य कर रहे तीन श्रमिक— जीशान निवासी बेडपुर (भगवानपुर, हरिद्वार), धीर सिंह निवासी शंकरपुरी (रुड़की) और शमीम निवासी नजीबाबाद (बिजनौर, उप्र) की मौत हो गई थी।
हादसे के प्रत्यक्षदर्शी श्रमिक हैदर अली ने बताया कि पुल के निर्माण में घटिया सामग्री और लापरवाही बरती जा रही थी, जिसके चलते यह हादसा हुआ। उसी ने रुड़की कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था।
जांच और आरोपपत्र
पुलिस विवेचना के बाद पांच लोगों के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया गया था। इनमें शामिल हैं—
• ठेकेदार मजहर अली, निवासी भटवाड़ी रोड, उत्तरकाशी
• अपर सहायक अभियंता छबील दास, लोनिवि रुड़की
• हैदर, निवासी मेहंदीबाग, नजीबाबाद
• अनिल कुमार और दीपक, निवासी लोनिवि कॉलोनी, सिविल लाइन रुड़की
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 13 गवाहों के बयान दर्ज कराए। लंबे समय तक चले मुकदमे के बाद अदालत ने सभी पांच अभियुक्तों को दोषी पाया।
न्यायालय की सख्त टिप्पणी
फैसले में न्यायालय ने सरकार और निर्माण एजेंसी की जिम्मेदारी तय करते हुए तीखी टिप्पणी की। अदालत ने कहा—
• पुल निर्माण में विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार हुआ।
• अभियंताओं और वरिष्ठ अधिकारियों ने घोर लापरवाही बरती, जिससे जन और धन की हानि हुई।
• कोई भी निर्माण कार्य जनता के पैसों से होता है और यदि वह लापरवाही के कारण विफल होता है तो संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों को सजा मिलनी चाहिए।
• ऐसी दुर्घटनाओं की संपूर्ण जिम्मेदारी केंद्र अथवा राज्य सरकार और निर्माण एजेंसी की होती है।
तेरह साल बाद मिला न्याय
करीब तेरह साल बाद इस मामले में दोषियों को सजा सुनाई गई है। अदालत के इस फैसले को लापरवाही और भ्रष्टाचार के मामलों में एक कड़ा संदेश माना जा रहा है, ताकि भविष्य में सरकारी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और जिम्मेदारी से कोई समझौता न किया जा सके।
रुड़की: 2012 में पुल गिरने से तीन श्रमिकों की मौत का मामला— अभियंता और ठेकेदार समेत पांच दोषी,





