नई दिल्ली (25 मार्च, 2026): पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध और तनाव के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। रसोई गैस (LPG) की किल्लत से जूझ रहे देशवासियों के लिए खुशखबरी यह है कि एलपीजी से लदे दो प्रमुख भारतीय जहाजों ने दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को सफलतापूर्वक पार कर लिया है। ये दोनों जहाज अब पूरी रफ्तार के साथ भारत की ओर बढ़ रहे हैं और उम्मीद जताई जा रही है कि आगामी शुक्रवार तक ये भारतीय बंदरगाहों पर लंगर डाल देंगे। इन जहाजों के आने से देश में रसोई गैस की आपूर्ति सुचारू होने और पिछले कुछ दिनों से बनी ‘पैनिक’ की स्थिति खत्म होने की प्रबल संभावना है।
93 हजार टन एलपीजी की खेप: आपूर्ति में आएगा सुधार
आने वाले जहाजों और उनके कार्गो की क्षमता का विवरण इस प्रकार है:
- विशाल खेप: पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, इन दोनों जहाजों में कुल मिलाकर लगभग 93,000 टन एलपीजी लदी हुई है।
- समय सीमा: जहाजों की वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह अनुमान लगाया गया है कि अगले 48 घंटों (दो दिन) के भीतर ये भारत पहुंच जाएंगे, जिसके तुरंत बाद बॉटलिंग प्लांटों तक गैस पहुंचाने का काम शुरू होगा।
- आपूर्ति में स्थिरता: मंत्रालय का मानना है कि इस खेप के पहुंचने से वितरण केंद्रों पर दबाव कम होगा और उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर मिल सकेंगे।
अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया से भी आ रही मदद: वैकल्पिक मार्गों का सहारा
पश्चिम एशिया विवाद के कारण भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर ‘प्लान-बी’ पर काम करना शुरू कर दिया है:
- नए सौदे: ‘दैनिक जागरण’ के सूत्रों के अनुसार, खाड़ी देशों में जारी तनाव को देखते हुए भारत ने हाल ही में अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया से भी एलपीजी की अतिरिक्त खेप खरीदी है।
- अगले 10 दिनों का रोडमैप: अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया से चले ये जहाज भी अगले 7 से 10 दिनों के भीतर भारतीय तटों पर पहुंचने की उम्मीद है, जिससे भविष्य में गैस की कमी का खतरा टल जाएगा।
रणनीतिक विविधता: भारत अब अपनी गैस आपूर्ति के लिए केवल पश्चिम एशिया पर निर्भर रहने के बजाय अन्य देशों से भी संपर्क साध रहा है ताकि युद्ध जैसी स्थितियों में घरेलू रसोई पर आंच न आए।





