नई दिल्ली। केंद्र सरकार की आर्थिक और श्रम नीतियों के विरोध में ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों ने गुरुवार को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया, जिसका असर कई राज्यों में सरकारी कामकाज, बैंकिंग और परिवहन सेवाओं पर पड़ा। दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच के अनुसार, इस आंदोलन में करीब 30 करोड़ मजदूरों की भागीदारी का दावा किया गया है।
ट्रेड यूनियनों का कहना है कि यह हड़ताल श्रमिकों और किसानों के हितों की अनदेखी, श्रम कानूनों में बदलाव और कॉर्पोरेट समर्थक नीतियों के विरोध में की जा रही है। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) की महासचिव अमरजीत कौर ने कहा कि इस बार हड़ताल का दायरा पहले की तुलना में व्यापक है। उनके अनुसार, इससे पहले 9 जुलाई 2025 को हुए आंदोलन में लगभग 25 करोड़ श्रमिकों ने हिस्सा लिया था।
संयुक्त मंच के मुताबिक, हड़ताल का असर 600 से अधिक जिलों में पड़ने की संभावना है। किसान संगठनों, कृषि मजदूर यूनियनों, छात्र और युवा संगठनों ने भी आंदोलन को समर्थन दिया है। कई औद्योगिक क्षेत्रों और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में कामकाज प्रभावित होने की खबरें सामने आईं।
हालांकि, आवश्यक सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहीं। अस्पताल, एम्बुलेंस, मेडिकल स्टोर और हवाई सेवाएं चालू रहीं, जबकि कई स्थानों पर राज्य परिवहन सेवाएं, ऑटो और सार्वजनिक बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हुईं। कुछ क्षेत्रों में बाजार और व्यावसायिक गतिविधियों पर भी आंशिक असर देखा गया।
विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में श्रमिकों की भागीदारी का दावा सरकार और श्रमिक संगठनों के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाता है। आने वाले दिनों में इस आंदोलन का राजनीतिक और आर्थिक असर और स्पष्ट होने की संभावना है।





