नई दिल्ली/मुंबई: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आगामी राज्यसभा चुनावों के लिए अपने उम्मीदवारों की बहुप्रतीक्षित दूसरी सूची जारी कर दी है। इस सूची में पार्टी ने क्षेत्रीय समीकरणों और सांगठनिक मजबूती को प्राथमिकता दी है। दूसरी सूची में सबसे प्रमुख नाम भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े और केंद्रीय मंत्री व आरपीआई (A) के प्रमुख रामदास अठावले के हैं, जिन्हें महाराष्ट्र से उम्मीदवार बनाया गया है। इस नई लिस्ट के साथ ही भाजपा अब तक कुल 13 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर चुकी है। पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने इन नामों पर मुहर लगाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने अनुभवी नेताओं और सहयोगियों को उच्च सदन भेजकर आगामी विधायी चुनौतियों के लिए खुद को तैयार कर रही है।
महाराष्ट्र का समीकरण: तावड़े और अठावले की जोड़ी
महाराष्ट्र की राजनीति के लिहाज से यह चयन काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है:
- विनोद तावड़े का कद: राष्ट्रीय राजनीति में संगठन मंत्री के तौर पर सफल पारी खेल रहे विनोद तावड़े को राज्यसभा भेजकर पार्टी उनके अनुभव का लाभ संसद के भीतर लेना चाहती है। उन्हें देवेंद्र फडणवीस का करीबी और मराठी वोट बैंक पर मजबूत पकड़ रखने वाला नेता माना जाता है।
- रामदास अठावले (RPI-A): गठबंधन धर्म को निभाते हुए भाजपा ने एक बार फिर दलित नेता और अपने पुराने सहयोगी रामदास अठावले को मौका दिया है। अठावले का नामांकन एनडीए (NDA) के भीतर एकजुटता का संदेश देने की कोशिश है।
अब तक की घोषणाएं: 13 चेहरों में अनुभव और युवा जोश का मेल
भाजपा ने अपनी पहली और दूसरी सूची मिलाकर अब तक 13 राज्यों और क्षेत्रों को कवर किया है:
- पहली सूची की झलक: पहली सूची में बिहार से नितिन नवीन और नीतीश कुमार (जेडीयू गठबंधन के तहत) जैसे बड़े नाम शामिल थे।
- क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व: पार्टी ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों के लिए भी अपने रणनीतिकारों को मैदान में उतारा है।
- जातीय संतुलन: उम्मीदवारों के चयन में ओबीसी, दलित और सवर्ण समाज के बीच संतुलन बनाने की पूरी कोशिश की गई है ताकि 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले सही संदेश दिया जा सके।
नामांकन की प्रक्रिया और रणनीतिक तैयारी
पार्टी आलाकमान ने सभी उम्मीदवारों को तुरंत नामांकन दाखिल करने के निर्देश दिए हैं:
- पटना और मुंबई में हलचल: आज जहाँ बिहार में नीतीश कुमार नामांकन दाखिल कर रहे हैं, वहीं मुंबई में विनोद तावड़े और रामदास अठावले के समर्थक जश्न मना रहे हैं।
- विरोधियों की घेराबंदी: राज्यसभा में बहुमत के करीब पहुँचने के लिए भाजपा की यह रणनीति बेहद अहम है, जिससे महत्वपूर्ण बिलों को पास कराने में सरकार को आसानी होगी।





