नई दिल्ली।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को 1965 के भारत–पाक युद्ध के दिग्गज सैनिकों के साथ संवाद के दौरान देश की सुरक्षा, राष्ट्रीय संकल्प और पड़ोसी देशों से रिश्तों को लेकर महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने कहा कि किसी भी युद्ध की जीत केवल सीमा पर लड़ी गई लड़ाई का परिणाम नहीं होती, बल्कि यह पूरे देश के लोगों के सामूहिक संकल्प और एकजुटता से संभव होती है।
पड़ोसियों से रिश्तों पर तीखा बयान
राजनाथ सिंह ने कहा, “भारत अपने पड़ोसियों के साथ संबंधों के मामले में भाग्यशाली नहीं रहा है। लेकिन हमने इसे नियति नहीं माना, बल्कि अपनी नियति खुद तय की है। इसका एक उदाहरण ऑपरेशन सिंदूर है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि देश कठिन परिस्थितियों के बावजूद आत्मनिर्भर होकर अपनी राह बनाता रहा है।
पहलगाम हमले का जिक्र और गुस्सा
अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने हालिया पहलगाम आतंकवादी हमले को याद करते हुए कहा कि इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया। उनके शब्दों में, “जब भी हम पहलगाम की भयावह घटनाओं को याद करते हैं, हमारा दिल भारी हो जाता है और मन गुस्से से भर उठता है। लेकिन इस हमले ने हमारे मनोबल को तोड़ा नहीं। हमने आतंकियों को ऐसा सबक सिखाया जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की होगी।”
ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जिसके तहत पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्रों में आतंकी ढांचे को निशाना बनाया गया। इस दौरान चार दिनों तक भीषण झड़पें चलीं और 10 मई को सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी। राजनाथ सिंह ने कहा कि इस अभियान ने दिखा दिया कि भारत की प्रतिरोध क्षमता कितनी सशक्त है और जीत अब अपवाद नहीं, बल्कि एक आदत बन चुकी है।
1965 युद्ध की स्मृति और शास्त्री का नेतृत्व
1965 के युद्ध को याद करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि वह समय बेहद कठिनाइयों और अनिश्चितताओं से भरा था, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के दृढ़ नेतृत्व ने पूरे देश को एकजुट किया। शास्त्री द्वारा दिया गया नारा “जय जवान, जय किसान” आज भी लोगों के मन में गूंजता है। सिंह ने कहा, “इस एक नारे में हमारे वीर जवानों के सम्मान और हमारे अन्नदाताओं के गौरव, दोनों का समावेश है।”
जवानों और किसानों को दी अहमियत
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की तरक्की में सैनिकों और किसानों दोनों की भूमिका समान रूप से महत्वपूर्ण है। सैनिक सीमा की सुरक्षा करते हैं तो किसान देश की खाद्य सुरक्षा की गारंटी देते हैं। उन्होंने कहा, “किसी भी राष्ट्र की प्रगति उसके सीमाओं की मजबूती और खेतों की हरियाली पर निर्भर करती है। यही वजह है कि जवान और किसान, दोनों ही हमारे राष्ट्रीय गौरव के स्तंभ हैं।”





