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रक्षा मंत्री बोले—आज की चुनौतियों से निपटने के लिए साझा प्रणाली जरूरी, एकीकरण से बढ़ेगा आत्मविश्वास

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री ने सोमवार को सुरक्षा व्यवस्था और सैन्य ढांचे को और सशक्त बनाने के लिए साझा प्रणाली (इंटीग्रेटेड सिस्टम) की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य और आधुनिक युद्ध की चुनौतियों से निपटने के लिए तीनों सेनाओं तथा सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय और एकीकरण अब समय की सबसे बड़ी मांग है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि आज की चुनौतियां बहुआयामी हैं—साइबर युद्ध से लेकर ड्रोन और अंतरिक्ष तक, सुरक्षा की हर परत पर नए खतरे मौजूद हैं। इनसे निपटने के लिए केवल परंपरागत ताकत ही काफी नहीं है, बल्कि साझा रणनीति और तकनीकी एकजुटता की भी आवश्यकता है। उन्होंने भरोसा जताया कि जब सेनाओं में बेहतर तालमेल और साझा संसाधनों का इस्तेमाल होगा, तो देश का आत्मविश्वास और क्षमता दोनों ही बढ़ेंगे।
उन्होंने कहा कि इंटीग्रेशन से न केवल संसाधनों का सदुपयोग और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी, बल्कि निर्णय लेने की प्रक्रिया भी तेज और प्रभावी होगी। इससे देश की रक्षा व्यवस्था को नई दिशा और मजबूती मिलेगी।
रक्षा मंत्री ने अधिकारियों और जवानों से अपील की कि वे नई तकनीकों और बदलते सुरक्षा परिदृश्य के साथ खुद को लगातार अपडेट करते रहें। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य केवल सीमाओं की रक्षा करना नहीं है, बल्कि राष्ट्र की रणनीतिक ताकत को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाना है।”

बैठक में उन्होंने यह भी संकेत दिए कि आने वाले समय में सरकार रक्षा क्षेत्र में आधुनिकीकरण, संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास और तकनीकी नवाचार पर विशेष जोर देने जा रही है। उनका मानना है कि इससे भारतीय सेनाओं की कार्यक्षमता और मनोबल और ऊंचा होगा।

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