नई दिल्ली: भारत ने रक्षा निर्यात (Defense Export) के मोर्चे पर एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए स्वदेशी रूप से विकसित ‘पिनाका’ मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम की पहली खेप आर्मेनिया को सफलतापूर्वक निर्यात कर दी है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा डिजाइन किए गए इस घातक हथियार का यह पहला विदेशी ऑर्डर है। आर्मेनिया और अज़रबैजान के बीच चल रहे तनाव के बीच, आर्मेनिया ने भारत के इस भरोसेमंद हथियार पर दांव लगाया है। जानकारों का मानना है कि ‘पिनाका’ का अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतरना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की सबसे बड़ी जीत है। इस आपूर्ति के साथ ही भारत अब दुनिया के उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा हो गया है जो उच्च क्षमता वाले रॉकेट आर्टिलरी सिस्टम का निर्यात करते हैं।
क्यों खास है पिनाका रॉकेट सिस्टम?
पिनाका अपनी मारक क्षमता और सटीकता के लिए पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है:
- मारक क्षमता: पिनाका का ‘इनहैंस्ड’ वर्जन मात्र 44 सेकंड में 12 रॉकेट दागने में सक्षम है, जो दुश्मन के बड़े इलाके को पल भर में तबाह कर सकता है।
- रेंज और सटीकता: यह सिस्टम 40 से 75 किलोमीटर तक की दूरी पर स्थित लक्ष्य को अचूक सटीकता के साथ भेद सकता है।
- मल्टी-टास्किंग: इसे ऊबड़-खाबड़ रास्तों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में आसानी से तैनात किया जा सकता है, जो इसे पर्वतीय युद्ध क्षेत्र (जैसे आर्मेनिया का भूगोल) के लिए आदर्श बनाता है।
आर्मेनिया के साथ रक्षा सौदे का महत्व
भारत और आर्मेनिया के बीच हुआ यह सौदा रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है:
- करोड़ों का अनुबंध: भारत और आर्मेनिया के बीच पिनाका, एंटी-टैंक मिसाइल और गोला-बारूद की आपूर्ति के लिए लगभग 2,000 करोड़ रुपये से अधिक का समझौता हुआ है।
- रूस-अमेरिका का विकल्प: अब तक कई देश हथियारों के लिए केवल रूस या अमेरिका पर निर्भर थे, लेकिन भारत ने ‘सस्ते और टिकाऊ’ हथियारों का एक मजबूत विकल्प पेश किया है।
- चीन-पाकिस्तान को कूटनीतिक जवाब: अज़रबैजान को तुर्की और पाकिस्तान का समर्थन प्राप्त है, ऐसे में आर्मेनिया को भारत द्वारा सैन्य सहायता देना एक मजबूत कूटनीतिक संदेश माना जा रहा है।
भारतीय रक्षा उद्योग के लिए ‘स्वर्ण युग’
पिनाका का निर्यात केवल एक सौदे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय निजी और सरकारी रक्षा कंपनियों की बढ़ती ताकत का प्रतीक है:
- DRDO और टाटा-एलएंडटी का मेल: पिनाका को DRDO ने विकसित किया है, जबकि टाटा पावर और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) जैसी निजी कंपनियां इसके निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
- बढ़ता निर्यात लक्ष्य: भारत सरकार ने साल 2025 तक रक्षा निर्यात को 35,000 करोड़ रुपये तक ले जाने का लक्ष्य रखा है, जिसमें पिनाका और ब्रह्मोस जैसे हथियार गेम-चेंजर साबित होंगे।
आर्मेनिया को पिनाका की सफल डिलीवरी के बाद अब कई अन्य देशों (जैसे दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य-पूर्व) ने भी इस सिस्टम में रुचि दिखाई है। यह भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ के साथ-साथ ‘हार्ड पावर’ के वैश्विक उदय का स्पष्ट संकेत है। स्वदेशी पिनाका अब न केवल भारतीय सीमाओं की रक्षा कर रहा है, बल्कि विदेशों में भी शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक प्रमुख जरिया बन गया है।





