नई दिल्ली (26 मार्च, 2026): भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंधों ने आज एक नई और रणनीतिक ऊंचाई को छू लिया है। राजधानी दिल्ली में आयोजित एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान दोनों देशों ने अत्याधुनिक सैन्य हथियारों और रक्षा उपकरणों के ‘सह-विकास और सह-उत्पादन’ (Co-development and Co-production) को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप की प्रगति का आकलन करना और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए एक मजबूत सुरक्षा ढांचा तैयार करना था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति के विजन के अनुरूप, अब दोनों देश केवल खरीदार और विक्रेता नहीं, बल्कि एक-दूसरे के रणनीतिक तकनीक साझेदार के रूप में उभर रहे हैं।
समीक्षा बैठक के मुख्य बिंदु: जेट इंजन से लेकर ड्रोन तकनीक तक चर्चा
दिल्ली में हुई इस बैठक में रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) के प्रतिनिधियों ने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की समीक्षा की:
- जेट इंजन तकनीक (iCET): बैठक में ‘क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी’ (iCET) के तहत GE F414 जेट इंजन के भारत में निर्माण की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया गया। यह तकनीक भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमानों (LCA Tejas Mk2) की शक्ति में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी।
- बख्तरबंद वाहन और स्ट्राइकर: दोनों देशों के बीच ‘स्ट्राइकर’ (Stryker) बख्तरबंद पैदल सेना वाहनों के संयुक्त उत्पादन को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई, जिससे भारतीय सेना की जमीनी मारक क्षमता और गतिशीलता में इजाफा होगा।
- ड्रोन और निगरानी तंत्र: ‘एमक्यू-9बी प्रीडेटर’ (MQ-9B Predator) ड्रोन सौदे के साथ-साथ भविष्य के मानवरहित विमानों (UAVs) के संयुक्त विकास पर भी सहमति बनी है।
‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगा वैश्विक बूस्ट: आत्मनिर्भरता की ओर कदम
यह साझेदारी भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान और रक्षा निर्यात लक्ष्यों के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाली है:
- तकनीक का हस्तांतरण (ToT): अमेरिका अब भारत को उन संवेदनशील रक्षा तकनीकों को साझा करने के लिए तैयार है, जो उसने पहले कभी किसी गैर-नाटो (Non-NATO) सहयोगी के साथ साझा नहीं की हैं।
- इंडस-एक्स (INDUS-X) पहल: बैठक में ‘इंडिया-यूएस डिफेंस एक्सेलेरेशन इकोसिस्टम’ (INDUS-X) के तहत स्टार्टअप्स और निजी उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया, ताकि रक्षा क्षेत्र में नए नवाचार (Innovation) लाए जा सकें।
- सप्लाई चेन की मजबूती: दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में एक सुरक्षित और लचीली डिफेंस सप्लाई चेन बनाने पर सहमति जताई है, ताकि किसी भी वैश्विक संकट के समय हथियारों की आपूर्ति बाधित न हो।





