हरिद्वार/बिजनौर: उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के सीमावर्ती जिलों के बीच सफर करने वाले यात्रियों के लिए एक राहत भरी खबर है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और दोनों राज्य सरकारों के बीच लंबे समय से चल रही चर्चा के बाद, हरिद्वार को उत्तर प्रदेश के बिजनौर और नजीबाबाद से जोड़ने वाले नए फोरलेन हाईवे का अलाइनमेंट फाइनल कर दिया गया है। इस नए मार्ग के बन जाने से न केवल दो राज्यों के बीच की दूरी कम होगी, बल्कि धर्मनगरी हरिद्वार में हर साल लगने वाले भीषण ट्रैफिक जाम से भी बड़ी राहत मिलेगी। विशेष रूप से मकर संक्रांति, कुंभ और कांवड़ मेले के दौरान यह हाईवे एक ‘लाइफलाइन’ की तरह काम करेगा।
कैसा होगा नया अलाइनमेंट? (रूट की विशेषताएं)
अधिकारियों के अनुसार, नया फोरलेन हाईवे मौजूदा भीड़भाड़ वाले रास्तों को बाईपास करते हुए बनाया जाएगा:
- हरिद्वार बाईपास: यह हाईवे हरिद्वार के बाहरी हिस्सों से गुजरेगा, जिससे नजीबाबाद और मुरादाबाद की ओर जाने वाले वाहनों को मुख्य शहर के भीतर प्रवेश करने की आवश्यकता नहीं होगी।
- प्रमुख जंक्शन: अलाइनमेंट के तहत प्रमुख चौराहों पर फ्लाईओवरों और अंडरपास का प्रावधान किया गया है ताकि बिना किसी बाधा के यातायात सुचारू रूप से चल सके।
- बिजनौर-नजीबाबाद लिंक: यूपी के बिजनौर जिले से उत्तराखंड की सीमा तक सड़क चौड़ीकरण और नए बाईपास का निर्माण किया जाएगा।
हरिद्वार को कैसे मिलेगी ट्रैफिक से राहत?
हरिद्वार शहर फिलहाल बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों के भारी दबाव से जूझ रहा है। इस फोरलेन के बनने से:
- भारी वाहनों का डायवर्जन: मुजफ्फरनगर और बिजनौर की ओर से आने वाले भारी वाहन शहर के बाहर-बाहर निकल जाएंगे, जिससे ‘हर की पैड़ी’ और बस स्टैंड वाले मार्गों पर भीड़ कम होगी।
- समय की बचत: वर्तमान में जो सफर तय करने में डेढ़ से दो घंटे लगते हैं, वह अब मात्र 45 से 50 मिनट में पूरा हो सकेगा।
- स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा: सुगम यातायात के कारण ऋषिकेश और ऊपरी हिमालयी क्षेत्रों की ओर जाने वाले पर्यटकों के लिए यात्रा पहले से कहीं अधिक सुविधाजनक हो जाएगी।
भूमि अधिग्रहण और निर्माण की प्रक्रिया
अलाइनमेंट फाइनल होने के साथ ही अब प्रशासन अगले चरण की ओर बढ़ रहा है:
- चिन्हीकरण: दोनों राज्यों के राजस्व विभाग ने उन गांवों और जमीनों को चिन्हित करने का काम शुरू कर दिया है जो इस हाईवे के दायरे में आएंगी।
- मुआवजा वितरण: भू-स्वामियों को दिए जाने वाले मुआवजे की दरों का निर्धारण जल्द ही कर दिया जाएगा ताकि निर्माण कार्य में कोई अड़चन न आए।
- पर्यावरण मंजूरी: संवेदनशील वन क्षेत्रों से गुजरने वाले पैच के लिए आवश्यक वन एवं पर्यावरण क्लीयरेंस की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है।
निष्कर्ष: विकास की नई राह
इस फोरलेन का निर्माण केवल एक सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि यह यूपी और उत्तराखंड के बीच व्यापारिक और धार्मिक पर्यटन के नए द्वार खोलेगा। हरिद्वार जिला प्रशासन और एनएचएआई का लक्ष्य है कि जल्द से जल्द टेंडर प्रक्रिया पूरी कर धरातल पर काम शुरू कराया जाए, ताकि अगले बड़े स्नान पर्वों से पहले इसका लाभ जनता को मिलना शुरू हो जाए।





