नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने पारदर्शिता और नियमों का पालन न करने पर देश के चार निजी विश्वविद्यालयों को डिफॉल्टर करार दिया है। आयोग ने साफ किया कि इन संस्थानों ने न केवल जरूरी जानकारियां छिपाईं, बल्कि अपनी आधिकारिक वेबसाइट को समय-समय पर अपडेट करने की अनिवार्य शर्त का भी पालन नहीं किया।
यूजीसी के अधिकारियों के मुताबिक, विश्वविद्यालयों को बार-बार चेतावनी और नोटिस जारी किए गए थे। इसके बावजूद संबंधित संस्थानों ने अपनी अकादमिक, प्रशासनिक और वित्तीय जानकारियों को सार्वजनिक डोमेन पर उपलब्ध नहीं कराया। आयोग का कहना है कि यह कदम छात्रों और अभिभावकों को गुमराह करने वाला है और पारदर्शिता के नियमों का खुला उल्लंघन है।
सूत्रों के अनुसार, यूजीसी ने इन चारों निजी विश्वविद्यालयों को डिफॉल्टर सूची में डालते हुए उन्हें तत्काल स्थिति सुधारने के निर्देश दिए हैं। यदि विश्वविद्यालय समय पर अनुपालन नहीं करते, तो उनके खिलाफ मान्यता से संबंधित सख्त कदम भी उठाए जा सकते हैं।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालयों की वेबसाइट पर पाठ्यक्रम, फैकल्टी, फीस संरचना, मान्यता की स्थिति और अन्य जरूरी जानकारी अपडेट रहना अनिवार्य है। इसका उद्देश्य छात्रों को सही जानकारी देकर उन्हें गलतफहमी से बचाना है।
यूजीसी के इस कदम से उच्च शिक्षा क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। छात्रों और अभिभावकों ने भी इस कार्रवाई का स्वागत किया है और कहा है कि ऐसे कठोर कदमों से निजी संस्थानों की मनमानी पर रोक लगेगी।





