लंदन/कीव। यूक्रेन संकट को लेकर रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने हाल ही में यूरोपीय संघ और नाटो पर आरोप लगाया कि वे यूक्रेन के माध्यम से रूस से सीधे लड़ाई कर रहे हैं। लावरोव ने कहा कि पश्चिमी देश यूक्रेन को हथियार, वित्तीय मदद और रणनीतिक समर्थन देकर रूस के खिलाफ युद्ध में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
ब्रिटेन ने आरोप खारिज किए
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ब्रिटेन सरकार ने लावरोव के आरोपों को खारिज कर दिया। ब्रिटिश विदेश मंत्रालय ने कहा कि यूक्रेन को दी जा रही मदद आत्मरक्षा के अधिकार के तहत है और इसमें किसी भी तरह की आक्रामकता या रूस से लड़ाई में सीधे भागीदारी शामिल नहीं है। मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि रूस का हमला अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और पश्चिमी देशों का यूक्रेन समर्थन इस नियम के अनुरूप है।
नाटो और ईयू का रुख
यूक्रेन की स्थिति पर नाटो और यूरोपीय संघ लगातार ध्यान दे रहे हैं। दोनों संस्थाएं मानती हैं कि रूस की सैन्य गतिविधियां क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए खतरा हैं। नाटो महासचिव और ईयू अधिकारियों ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि उनका समर्थन रूसी आक्रामकता के खिलाफ यूक्रेन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है, न कि रूस से सीधे लड़ाई करने के लिए।
युद्ध और वैश्विक राजनीति
विशेषज्ञों का कहना है कि रूस और पश्चिम के बीच यह बयानबाजी वैश्विक कूटनीति में तनाव को और बढ़ा सकती है। यूक्रेन संकट के चलते पश्चिमी देशों ने रूस के खिलाफ प्रतिबंध लगाए हैं और सैन्य सहायता के जरिए यूक्रेन की मदद जारी रखी है। वहीं, रूस इसे नकारते हुए पश्चिम को अपनी सुरक्षा पर खतरा मान रहा है।
पृष्ठभूमि
युद्ध के महीनों बाद भी यूक्रेन संकट में कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए राजनीतिक और सैन्य रणनीतियों को बढ़ा रहे हैं। रूस का आरोप और पश्चिम का खंडन इस युद्ध में वैश्विक मोर्चे पर कूटनीतिक जंग को और जटिल बना रहा है।
यूक्रेन के माध्यम से रूस से लड़ रहे हैं नाटो और ईयू, लावरोव के आरोपों को ब्रिटेन ने खारिज किया





