देहरादून : उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) की स्नातक स्तरीय परीक्षा में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर युवाओं का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। राजधानी देहरादून के परेड ग्राउंड के पास सोमवार से शुरू हुआ धरना चौथे दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी युवा परीक्षा रद्द कराने की मांग पर अड़े हुए हैं और उन्होंने प्रदेश सरकार की ओर से उठाए गए कदमों को ‘मीठी टॉफी’ करार दिया है।
युवाओं का आरोप है कि भर्ती परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है और जब तक परीक्षा निरस्त नहीं की जाती, आंदोलन जारी रहेगा। धरने के दौरान अलग-अलग संगठनों और छात्र नेताओं ने युवाओं को संबोधित किया और उनके आंदोलन को समर्थन दिया।
धरना शुरू होने के बाद से ही युवाओं ने मुख्यमंत्री आवास कूच करने का प्रयास किया था, लेकिन पुलिस ने कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका में उन्हें परेड ग्राउंड पर ही रोक दिया। इसके बाद से दर्जनों युवा दिन-रात वहीं पर डटे हुए हैं। मंगलवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदर्शनकारी युवाओं के एक प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए बुलाया। लंबी बातचीत के बावजूद कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका और युवा अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हुए।
इस बीच, सरकार ने जांच की दिशा में कुछ कदम उठाए हैं। पुलिस अब तक दो आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं, विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है और एक पूर्व न्यायाधीश से भी मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने का आदेश जारी किया गया है।
फिर भी प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक परीक्षा रद्द नहीं की जाती, वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे। बुधवार को भी परेड ग्राउंड पर बड़ी संख्या में युवा सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे और अनिश्चितकालीन धरने को जारी रखा।





