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यमुनोत्री धाम में कुदरत का कहर: भारी हिमस्खलन से पैदल मार्ग क्षतिग्रस्त, कई फीट बर्फ में दबे रास्ते; जान जोखिम में डाल लौट रहे मजदूर

यमुनोत्री/उत्तरकाशी (26 मार्च, 2026): चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले ही उच्च हिमालयी क्षेत्र यमुनोत्री धाम में प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिला है। यमुनोत्री पैदल मार्ग पर भैरो मंदिर के समीप एक भीषण हिमस्खलन (Avalanche) होने से यात्रा मार्ग का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। हिमस्खलन के कारण मुख्य रास्ते पर कई फीट बर्फ का अंबार जमा हो गया है, जिससे धाम तक पहुंचने वाला संपर्क कट गया है। इस आपदा की गंभीरता तब और बढ़ गई जब यात्रा की तैयारियों और सुरक्षात्मक कार्यों के लिए धाम जा रहे मजदूर और कर्मचारी भी रास्ते में फंस गए। भारी बर्फबारी और कड़ाके की ठंड के बीच इन मजदूरों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ रही है।

पैदल मार्ग ध्वस्त: यात्रा की तैयारियों को लगा बड़ा झटका

यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने में अब कुछ ही समय शेष है, लेकिन इस हिमस्खलन ने प्रशासन की चिंताओं को बढ़ा दिया है:

  • भैरो मंदिर के पास तबाही: हिमस्खलन का मुख्य केंद्र भैरो मंदिर के ऊपरी पहाड़ी क्षेत्र को बताया जा रहा है। वहां से भारी मात्रा में बर्फ और मलबे के नीचे आने से सुरक्षा रेलिंग और पैदल मार्ग के पुश्ते ढह गए हैं।
  • बर्फ की मोटी चादर: मार्ग पर 4 से 6 फीट तक बर्फ जमा होने की सूचना है, जिससे पैदल चलना भी नामुमकिन हो गया है। जानकारों का कहना है कि रास्ते को दोबारा सुचारू करने में कई सप्ताह का समय लग सकता है।
  • मजदूरों का रेस्क्यू: यात्रा सीजन से पहले मार्ग सुधारीकरण और टिन शेड मरम्मत के लिए गए मजदूर बीच रास्ते में फंस गए थे। खराब मौसम के बावजूद कुछ मजदूरों ने सुरक्षित स्थानों की ओर रुख किया है, जबकि कई अभी भी सुरक्षित ठिकानों पर मौसम साफ होने का इंतजार कर रहे हैं।

प्रशासनिक सतर्कता: धाम की ओर आवाजाही पर फिलहाल रोक

घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग (SDRF) अलर्ट मोड पर आ गया है:

  1. निरीक्षण दल रवाना: जिलाधिकारी के निर्देश पर राजस्व विभाग और जल संस्थान की एक टीम नुकसान का जायजा लेने के लिए रवाना की गई है, हालांकि भारी बर्फबारी के कारण टीम को आगे बढ़ने में बाधा आ रही है।
  2. श्रद्धालुओं को चेतावनी: यमुनोत्री मंदिर समिति और प्रशासन ने स्थानीय लोगों और श्रमिकों को फिलहाल जानकीचट्टी से ऊपर न जाने की सख्त हिदायत दी है। पहाड़ी से अभी भी रुक-रुक कर बर्फ गिरने (Snow Sliding) का खतरा बना हुआ है।
  3. मरम्मत की चुनौती: बीआरओ (BRO) और लोक निर्माण विभाग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती कपाट खुलने से पहले इस मलबे को हटाकर रास्ते को श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित बनाने की है।

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