वाशिंगटन डीसी/नई दिल्ली:अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ शक्तियों पर अंकुश लगाने के ऐतिहासिक फैसले के बावजूद, ट्रंप के तेवर नरम पड़ते नहीं दिख रहे हैं। कोर्ट का फैसला आने के कुछ ही घंटों बाद ट्रंप ने भारत के साथ व्यापारिक संबंधों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने पीएम मोदी को अपना ‘महान मित्र’ और एक ‘शानदार इंसान’ बताया, लेकिन साथ ही साफ कर दिया कि व्यापार के मामले में वे भारत को कोई बड़ी छूट देने के मूड में नहीं हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि अगर भारत अमेरिका में अपना सामान बेचना चाहता है, तो उसे ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ (पारस्परिक शुल्क) का भुगतान करना ही होगा।
मोदी की तारीफ, व्यापार पर सख्ती: ट्रंप का ‘दोहरा’ रुख
वाशिंगटन में पत्रकारों से चर्चा के दौरान ट्रंप ने भारत के प्रति अपनी नीति को स्पष्ट किया:
- निजी मित्रता बनाम व्यापार: ट्रंप ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी मेरे बहुत अच्छे मित्र हैं, वे एक महान नेता और महान व्यक्ति हैं। लेकिन जब व्यापार की बात आती है, तो भारत दुनिया के सबसे बड़े टैरिफ लगाने वाले देशों में से एक है। हम इसे और बर्दाश्त नहीं कर सकते।”
- ‘टैरिफ किंग’ का आरोप: ट्रंप ने एक बार फिर भारत को ‘टैरिफ किंग’ बताते हुए आरोप लगाया कि भारत अमेरिकी उत्पादों (जैसे हार्ले डेविडसन मोटरसाइकिल) पर $100$ प्रतिशत तक टैक्स लगाता है, जबकि अमेरिका भारतीय उत्पादों पर बहुत कम शुल्क लेता है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पलटवार
नील कात्याल की दलीलों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के पुराने टैरिफ आदेश को रद्द कर दिया था, जिस पर ट्रंप ने नई रणनीति का संकेत दिया:
- नया कार्यकारी आदेश: ट्रंप ने संकेत दिया कि वे कोर्ट की कानूनी आपत्तियों को दूर करते हुए एक नया व्यापारिक मसौदा तैयार कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “अगर एक कानून काम नहीं करेगा, तो हम दूसरे कानून का उपयोग करेंगे, लेकिन अमेरिकी अर्थव्यवस्था की रक्षा करेंगे।”
- ट्रेड डील की शर्त: ट्रंप ने भारत के साथ प्रस्तावित ट्रेड डील (Trade Deal) को लेकर शर्त रख दी है। उन्होंने कहा कि कोई भी समझौता तभी होगा जब भारत अपने टैरिफ कम करेगा या अमेरिका के बराबर लाएगा।
भारत के लिए क्या है चुनौती?
ट्रंप के इस बयान ने भारत सरकार और निर्यातकों के लिए नई चिंताएं पैदा कर दी हैं:
- आईटी और ऑटो सेक्टर पर नजर: ट्रंप प्रशासन विशेष रूप से भारतीय आईटी सेवाओं और कृषि उत्पादों पर नजर गड़ाए हुए है।
- रणनीतिक संतुलन: भारत के लिए चुनौती यह है कि वह अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था की सुरक्षा (High Tariffs) और अमेरिका के साथ मजबूत सामरिक संबंधों के बीच संतुलन कैसे बनाए।
विशेषज्ञों की राय: ‘प्रेशर टैक्टिक्स’ का हिस्सा
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान एक ‘प्रेशर टैक्टिक्स’ (दबाव की राजनीति) है। वे पीएम मोदी की तारीफ कर कूटनीतिक रास्ते खुले रखना चाहते हैं, लेकिन साथ ही अपने समर्थकों को यह संदेश दे रहे हैं कि वे ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति से पीछे नहीं हटेंगे।





