नई दिल्ली। देश के करोड़ों किसानों के लिए केंद्र सरकार ने एक और बड़ी घोषणा की है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 20वीं किस्त का इंतजार कर रहे किसानों को राहत देते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना’ को मंजूरी दे दी है। यह योजना 24,000 करोड़ रुपये के वार्षिक परिव्यय और छह वर्ष की अवधि के लिए लागू की जाएगी।
36 योजनाएं होंगी एकीकृत, 100 कृषि जिलों का होगा चयन
इस नई योजना के तहत सरकार 36 मौजूदा योजनाओं को एकीकृत करेगी और 100 जिलों को ‘कृषि जिलों’ के रूप में विशेष रूप से विकसित किया जाएगा। इस योजना की घोषणा केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने की।
उन्होंने बताया कि योजना का मुख्य उद्देश्य कृषि उत्पादकता में वृद्धि, सिंचाई सुविधाओं में सुधार, फसल कटाई के बाद भंडारण क्षमता बढ़ाना और फसल विविधीकरण व टिकाऊ खेती को प्रोत्साहन देना है। इससे देशभर के करीब 1.7 करोड़ किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
किसानों को क्या-क्या मिलेगा फायदा?
1. उपज का बेहतर मूल्य:
किसानों को फसलों का उचित मूल्य दिलाने के लिए प्रसंस्करण व वितरण को मजबूत किया जाएगा।
2. जलवायु अनुकूल बीज और फसल विविधीकरण:
योजना के तहत जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बीजों के विकास और उपयोग को प्रोत्साहन मिलेगा।
3. भंडारण और सप्लाई चेन सुधार:
फसल कटाई के बाद उपज भंडारण और आपूर्ति प्रणाली को बेहतर बनाया जाएगा।
4. दालों में आत्मनिर्भरता:
छह वर्षीय “दाल आत्मनिर्भरता मिशन” चलाया जाएगा, जिससे देश को दालों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम होगा।
5. कृषि में कौशल और निवेश:
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में रोजगार, निवेश और तकनीक के माध्यम से समृद्धि लाने पर जोर होगा।
6. सब्जी और फल उत्पादन को बढ़ावा:
उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग तक की पूरी श्रृंखला को मज़बूत किया जाएगा ताकि किसानों को सीधा लाभ मिले।
7. ग्रामीण ऋण स्कोरिंग सिस्टम:
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा ‘ग्रामीण ऋण स्कोर’ विकसित किया जाएगा, जिससे किसानों को ऋण प्राप्त करना आसान होगा।
नया विजन, समृद्ध किसान
‘पीएम धन-धान्य कृषि योजना’ के ज़रिए सरकार का लक्ष्य सिर्फ फसल उत्पादन ही नहीं, बल्कि खेती को एक लाभकारी, टिकाऊ और आधुनिक पेशा बनाना है। इसके माध्यम से किसानों को बेहतर तकनीक, मूल्य, भंडारण और प्रशिक्षण जैसे संसाधनों तक पहुंच मिलेगी।
कृषि क्षेत्र में यह योजना एक समग्र और परिवर्तनकारी पहल के रूप में देखी जा रही है, जो आने वाले वर्षों में ग्रामीण भारत की तस्वीर बदल सकती है।





