शिलांग/पूर्वी जयंतिया हिल्स: मेघालय के पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले में स्थित एक कोयला खदान में भीषण विस्फोट होने से बड़ा हादसा हो गया है। इस दुर्घटना में खदान के भीतर काम कर रहे कई मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। धमाका इतना जोरदार था कि खदान का एक हिस्सा पूरी तरह ढह गया, जिससे बचाव दल को अंदर पहुँचने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें (SDRF) मौके पर पहुँच चुकी हैं और युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
हादसे का कारण: कैसे हुआ धमाका?
प्रारंभिक जांच और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी के अनुसार, हादसा खदान की गहराई में हुआ:
- गैस रिसाव और विस्फोट: अंदेशा जताया जा रहा है कि खदान के भीतर मीथेन जैसी ज्वलनशील गैस के रिसाव के कारण यह धमाका हुआ। कोयला खदानों में अक्सर ऑक्सीजन की कमी और गैसों का दबाव ऐसे विस्फोटों का कारण बनता है।
- अवैध खनन का संदेह: स्थानीय सूत्रों का दावा है कि यह खदान अवैध रूप से संचालित की जा रही थी। मेघालय में ‘रैट-होल माइनिंग’ (Rat-hole Mining) पर प्रतिबंध के बावजूद चोरी-छिपे खनन की शिकायतें अक्सर सामने आती रहती हैं।
राहत और बचाव अभियान की चुनौतियां
दुर्घटनास्थल की भौगोलिक स्थिति और खदान की गहराई बचाव कार्य में बड़ी बाधा बन रही है:
- मलबे में दबे मजदूर: जिला प्रशासन के अनुसार, अभी तक कुछ शवों को बाहर निकाला जा चुका है, जिनकी शिनाख्त की जा रही है। लापता मजदूरों की तलाश के लिए विशेष उपकरणों की मदद ली जा रही है।
- जहरीली गैसों का खतरा: खदान के भीतर अभी भी जहरीली गैसों का असर होने की संभावना है, जिसके कारण बचाव दल के सदस्य ऑक्सीजन मास्क और सुरक्षा गियर के साथ ही भीतर प्रवेश कर रहे हैं।
- घायलों की स्थिति: मलबे से सुरक्षित निकाले गए कुछ मजदूरों को गंभीर हालत में नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई है।
सरकार और प्रशासन का कड़ा रुख
राज्य सरकार ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं:
- जांच कमेटी का गठन: मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक विशेष टीम का गठन किया है जो इस बात की जांच करेगी कि प्रतिबंधित क्षेत्र में खनन कार्य कैसे चल रहा था।
- मुआवजे का ऐलान: सरकार ने मृतकों के परिजनों के लिए आर्थिक सहायता और घायलों के मुफ्त इलाज की घोषणा की है।
- लापरवाही पर कार्रवाई: जिला पुलिस को उन ठेकेदारों और खदान मालिकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं, जो सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर मजदूरों को जोखिम में डाल रहे थे।
मेघालय में खदान हादसों का इतिहास
मेघालय में यह पहली बार नहीं है जब कोयला खदानों में मजदूरों की जान गई है। इससे पहले भी पूर्वी जयंतिया हिल्स में कई बार खदानों में पानी भरने या विस्फोट होने से दर्जनों मजदूरों की मौत हो चुकी है। पर्यावरणविदों ने बार-बार इन असुरक्षित खदानों को बंद करने की मांग की है।
“यह एक अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। हमारी पहली प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। जो भी इस अवैध गतिविधि और लापरवाही के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।” — उपायुक्त, पूर्वी जयंतिया हिल्स





