मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के मेयर (महापौर) चुनाव का बिगुल फुक चुका है और इसी के साथ बीएमसी (BMC) के गलियारों में राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुँच गई है। करीब ढाई साल से अधिक समय तक प्रशासक के राज के बाद, अब मुंबई को नया महापौर मिलने जा रहा है। इस बार का चुनाव इसलिए भी खास है क्योंकि भाजपा और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का गठबंधन बीएमसी पर अपना परचम लहराने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है। विशेष रूप से भाजपा के भीतर उम्मीदवार के चयन को लेकर गहन मंथन जारी है, जहाँ अनुभव और क्षेत्रीय समीकरणों के आधार पर 6 प्रमुख नामों की चर्चा जोरों पर है।
भाजपा के ‘सुपर सिक्स’: किसके सिर सजेगा ताज?
पार्टी सूत्रों के अनुसार, भाजपा इस बार किसी ऐसे चेहरे को आगे करना चाहती है जो न केवल प्रशासनिक रूप से कुशल हो, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनावों में भी पार्टी के पक्ष में माहौल बना सके। चर्चा में शामिल 6 बड़े नाम इस प्रकार हैं:
- आशीष शेलार: मुंबई भाजपा के अध्यक्ष और कद्दावर नेता। उनके पास संगठन और प्रशासन का व्यापक अनुभव है और वे मराठी वोट बैंक में गहरी पैठ रखते हैं।
- पराग अलवणी: विले पार्ले से विधायक और अनुभवी पार्षद रह चुके पराग अलवणी को उनके कानूनी ज्ञान और बीएमसी की कार्यप्रणाली की बारीकियों को समझने के लिए जाना जाता है।
- मनोज कोटक: पूर्व सांसद और बीएमसी में भाजपा के पूर्व गुट नेता। कोटक का नाम गुजराती और मारवाड़ी समुदाय के बीच काफी लोकप्रिय है।
- अमित साटम: पश्चिमी उपनगरों में सक्रिय युवा चेहरा। अमित साटम अपनी आक्रामक कार्यशैली और विकास कार्यों के लिए जाने जाते हैं।
- प्रभाकर शिंदे: बीएमसी में भाजपा के नेता के तौर पर लंबे समय तक विपक्ष की भूमिका निभाने वाले शिंदे को अनुभवी चेहरों में गिना जाता है।
- शीतल गंभीर-देसाई: महिला चेहरे के तौर पर शीतल गंभीर का नाम भी रेस में है। यदि भाजपा किसी महिला को मौका देना चाहती है, तो वे एक मजबूत विकल्प साबित हो सकती हैं।
बीएमसी का चुनावी गणित: गठबंधन बनाम विपक्ष
मुंबई मेयर का चुनाव इस बार आंकड़ों और गठबंधन की मजबूती का कड़ा इम्तिहान होगा:
- महायुति की रणनीति: भाजपा और शिंदे गुट मिलकर चुनाव लड़ेंगे। दोनों दलों के बीच समन्वय बिठाने के लिए दिल्ली से भी पर्यवेक्षक भेजे जा सकते हैं।
- विपक्ष की घेराबंदी: दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) और महाविकास अघाड़ी (MVA) भी अपनी साख बचाने के लिए इस चुनाव को चुनौती के रूप में ले रही हैं।
- बहुमत का आंकड़ा: बीएमसी में कुल 227 सीटें हैं। महापौर की कुर्सी तक पहुँचने के लिए 114 के जादुई आंकड़े की आवश्यकता होगी।
भाजपा के लिए चुनौतियां और अवसर
भाजपा के लिए यह चुनाव केवल मेयर चुनने का मामला नहीं है, बल्कि यह मुंबई पर ‘ठाकरे ब्रांड’ के दबदबे को खत्म करने का एक बड़ा अवसर है। पार्टी को अपने उम्मीदवार का चयन करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना होगा:
- मराठी बनाम गैर-मराठी: मुंबई की जनसांख्यिकी को देखते हुए पार्टी को भाषाई संतुलन बनाना होगा।
- विकास का एजेंडा: कोस्टल रोड, मेट्रो और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को मेयर के चेहरे के जरिए भुनाने की कोशिश की जाएगी।
- शिंदे गुट का साथ: डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस और सीएम एकनाथ शिंदे के बीच इस पद को लेकर आपसी सहमति बनाना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।
निष्कर्ष: जल्द हो सकता है आधिकारिक एलान
पार्टी की कोर कमेटी की बैठक अगले 48 घंटों में होने की संभावना है, जिसके बाद उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्ट केंद्रीय नेतृत्व को भेजी जाएगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा किसी ऐसे नाम को चौंकाने वाले विकल्प के रूप में भी ला सकती है जो वर्तमान रेस से बाहर हो।
“मुंबई का मेयर शहर के भविष्य की दिशा तय करता है। भाजपा इस बार एक ऐसा विजनरी चेहरा देगी जो मुंबई को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों पर ले जा सके।” — भाजपा प्रवक्ता, महाराष्ट्र





