Thursday, March 5, 2026

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मितेरी पुल ढहा, कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर प्रभावित

25 हजार भारतीय श्रद्धालुओं के पहुंचने की थी उम्मीद, वैकल्पिक मार्ग खोलने की मांग तेज

पांच साल के लंबे अंतराल के बाद पुनः शुरू हुई कैलाश मानसरोवर यात्रा एक बार फिर रोक दी गई है, और इसका कारण बना है नेपाल-चीन सीमा पर स्थित मितेरी पुल का बह जाना। यह पुल रसुवागढ़ी गांव के पास स्थित था और नेपाल के रास्ते कैलाश जाने वाले श्रद्धालुओं का प्रमुख मार्ग था।

25 हजार तीर्थयात्रियों की उम्मीद, लेकिन यात्रा ठप

ट्रेकिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ नेपाल (TAAN) ने जानकारी दी है कि 2025 में कम से कम 25,000 भारतीय श्रद्धालुओं के नेपाल के रास्ते कैलाश मानसरोवर जाने की संभावना थी। लेकिन मितेरी पुल के बहने से यात्रियों की आवाजाही ठप हो गई है और स्थानीय कारोबार पर भी असर पड़ा है।

बाढ़ के कारण बहा पुल

टीएएएन के महासचिव सोनम ग्यालजेन शेरपा के अनुसार, मंगलवार सुबह लेहेंडे नदी में आई बाढ़ की वजह से यह महत्वपूर्ण पुल बह गया। अब तिब्बत स्थित कैलाश मानसरोवर जाने का यह प्रमुख रास्ता बंद हो चुका है।

शेरपा समुदाय और टीएएएन की अपील

टीएएएन ने नेपाल के विदेश मंत्रालय से आग्रह किया है कि वह चीनी दूतावास के साथ कूटनीतिक बातचीत कर वीजा प्रक्रिया को सरल और तेज बनाए। साथ ही, तातोपानी, कोरोला, हिल्सा जैसे वैकल्पिक मार्गों को खोलने की मांग की गई है।

शेरपा समुदाय ने कहा है कि यह सिर्फ तीर्थयात्रियों की परेशानी नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ा झटका है।

कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की ज़रूरत

27 जनवरी 2025 को बीजिंग में भारत और चीन के बीच हुई बैठक में कैलाश यात्रा को फिर से शुरू करने पर सहमति बनी थी। भारत सरकार की ओर से लिपुलेख (उत्तराखंड) और नाथू ला (सिक्किम) के रास्ते यात्रा कराई जाती है, लेकिन ज्यादातर भारतीय श्रद्धालु नेपाल के निजी मार्गों से यात्रा करना पसंद करते हैं, जो अधिक लचीले और कम समय में पूरे हो जाते हैं।

नेपाल से कैलाश मानसरोवर के लिए प्रमुख निजी मार्ग:

  • तातोपानी
  • रसुवागढ़ी (अब बंद)
  • हिल्सा
  • काठमांडू से ल्हासा की फ्लाइट

मितेरी पुल के ढहने से न केवल श्रद्धालुओं की धार्मिक यात्रा बाधित हुई है, बल्कि इससे नेपाल-तिब्बत सीमा पर पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों पर भी असर पड़ा है। अब उम्मीदें वैकल्पिक मार्गों के शीघ्र खुलने और भारत-नेपाल-चीन के बीच त्वरित कूटनीतिक पहल पर टिकी हैं।

 

 

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