टनकपुर/चम्पावत: उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध शक्तिपीठ मां पूर्णागिरि धाम आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। लंबे समय से प्रतीक्षित पूर्णागिरि रोपवे परियोजना अब धरातल पर उतरने को तैयार है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने के बाद श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुँचने के लिए की जाने वाली 6 किलोमीटर की कठिन पैदल चढ़ाई से निजात मिल जाएगी। आधुनिक तकनीक से लैस यह रोपवे न केवल बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए वरदान साबित होगा, बल्कि इससे मंदिर तक पहुँचने का समय भी काफी कम हो जाएगा।
परियोजना की मुख्य विशेषताएं
शासन द्वारा स्वीकृत इस रोपवे को अत्याधुनिक मानकों पर तैयार किया जा रहा है:
- बड़ी क्षमता: यह रोपवे प्रति घंटे लगभग 800 श्रद्धालुओं को मुख्य मंदिर के करीब पहुँचाने की क्षमता रखेगा।
- दूरी में भारी कटौती: वर्तमान में श्रद्धालुओं को ठुलीगाड़ से मुख्य मंदिर तक लगभग 6 किमी का पैदल सफर तय करना पड़ता है। रोपवे के शुरू होने के बाद यह दूरी महज कुछ मिनटों में पूरी हो जाएगी।
- सुरक्षित और आधुनिक सफर: रोपवे में आधुनिक केबिन लगाए जाएंगे, जिनसे श्रद्धालु हिमालय की तराई और शारदा नदी के विहंगम दृश्यों का आनंद ले सकेंगे।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को लगेगा पंख
इस परियोजना के शुरू होने से चम्पावत जिले में पर्यटन के नए द्वार खुलेंगे:
- साल भर बढ़ेगी भीड़: अभी मुख्य रूप से चैत्र नवरात्र के मेले के दौरान यहाँ भारी भीड़ रहती है, लेकिन सुविधा बढ़ने से साल भर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहेगा।
- रोजगार के अवसर: रोपवे स्टेशन के आसपास नई दुकानें, होटल और होमस्टे विकसित होंगे, जिससे स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा।
- बुजुर्गों के लिए वरदान: चढ़ाई कठिन होने के कारण कई बुजुर्ग श्रद्धालु नीचे से ही मत्था टेककर लौट जाते थे, अब वे भी सुगमता से मां के दर्शन कर सकेंगे।
निर्माण कार्य और पर्यावरण का ध्यान
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा और पर्यावरण मानकों का पूरा ख्याल रखा जाएगा:
- इको-फ्रेंडली तकनीक: रोपवे के खंभों और स्टेशनों के निर्माण के दौरान कम से कम पेड़ों को नुकसान पहुँचाने की योजना तैयार की गई है।
- सुरक्षा ऑडिट: परिचालन शुरू होने से पहले विशेषज्ञों की टीम द्वारा कड़ा सुरक्षा ऑडिट किया जाएगा ताकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।





