वाशिंगटन/तेहरान। पिछले पांच हफ्तों से जारी अमेरिका और ईरान के बीच भीषण युद्ध के बीच बुधवार सुबह वैश्विक समुदाय के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि दोनों देशों के बीच दो सप्ताह के संघर्ष विराम (Ceasefire) को लेकर सहमति बन गई है। ईरान ने भी अंतरराष्ट्रीय दबाव और कूटनीतिक वार्ताओं के बाद इस सीजफायर को स्वीकार कर लिया है, जिससे एक बड़े क्षेत्रीय महायुद्ध का खतरा फिलहाल टल गया है।
समझौते से पहले भीषण प्रहार: खार्क द्वीप पर भारी बमबारी
दिलचस्प और चिंताजनक बात यह है कि इस शांति समझौते की घोषणा से ठीक पहले अमेरिकी वायुसेना ने अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करते हुए ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर भीषण हमले किए।
- खार्क द्वीप पर हमला: अमेरिका ने ईरान के महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्र खार्क द्वीप (Kharg Island) और कई प्रमुख शहरों पर भारी हवाई हमले किए।
- अंतिम चेतावनी: इन हमलों के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने बेहद सख्त लहजे में चेतावनी जारी की थी। उन्होंने कहा था कि यदि यह समझौता सिरे नहीं चढ़ा, तो “एक पूरी सभ्यता खत्म हो जाएगी”, जिसे भविष्य में फिर कभी वापस नहीं लाया जा सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस ‘मनोवैज्ञानिक दबाव’ ने ईरान को झुकने पर मजबूर किया।
दो सप्ताह का समय: कूटनीति के लिए आखिरी मौका
यह संघर्ष विराम फिलहाल केवल 14 दिनों के लिए लागू किया गया है। इस अवधि का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच स्थायी शांति की शर्तों पर बातचीत करना है।
- होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा: माना जा रहा है कि इस समझौते के तहत ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को फिर से बहाल करने पर चर्चा के लिए राजी हुआ है।
- वैश्विक प्रभाव: इस घोषणा के बाद दुनिया भर के शेयर बाजारों में तेजी देखी गई है और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आने की उम्मीद जताई जा रही है।
विनाश की कगार पर था पश्चिम एशिया
पिछले एक महीने से जारी इस संघर्ष ने मिडिल ईस्ट के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचाया है। हजारों लोगों की जान जा चुकी है और करोड़ों लोग विस्थापित हुए हैं। ट्रंप के ‘सिविलाइजेशन’ (सभ्यता) वाले बयान ने परमाणु युद्ध की आशंकाओं को भी जन्म दे दिया था, लेकिन फिलहाल सीजफायर ने दुनिया को एक उम्मीद दी है।
“हम दुनिया को जलते हुए नहीं देखना चाहते, लेकिन हम अपनी सुरक्षा से समझौता भी नहीं करेंगे। यह दो सप्ताह ईरान के लिए यह साबित करने का मौका है कि वे शांति चाहते हैं।” — वाशिंगटन से जारी आधिकारिक बयान





