महाराष्ट्र में होने वाले विधानसभा चुनाव में तीसरा मोर्चा ताल ठोकने की तैयारी में है, जो सत्ताधारी महायुति और विपक्षी दलों के गठबंधन महा विकास आघाड़ी (एमवीए) के लिए ही सिरदर्द साबित हो सकता है। तीसरे मोर्चे में दलित, मराठा फैक्टर है। इससे भाजपा, शिवसेना एवं एनसीपी की महायुति और कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) व एनसीपी (एसपी) की एमवीए दोनो का चुनावी गणित गड़बड़ा सकता है। डॉ. भीमराव आंबेडकर के परपोते राजरत्न आंबेडकर ने ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत में कहा कि राज्य में तीसरी आघाड़ी बन रही हैं, जिसमें मराठा आरक्षण के लिए आंदोलनरत मनोज जरांगे पाटिल, कोल्हापुर रियासत के पूर्व सांसद संभाजी राजे और प्रहार संगठन के बच्चू कड़ू शामिल हैं। उनके बीच न केवल समझौता हो चुका है बल्कि सभी 288 सीटों पर चुनाव लड़ने की रूपरेखा भी तैयार है। आंबेडकर ने दावा किया कि तीसरे मोर्चे के समर्थन के बिना सूबे में नई सरकार नहीं बन सकेगी। बच्चू कड़ू ने संभाजी राजे के साथ बैठक कर तीसरे मोर्चे का संकेत दिया था। वहीं, मनोज जरांगे पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि सभी सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। राजरत्न आंबेडकर ने अब इसकी पुष्टि कर दी है।महाराष्ट्र की राजनीति में चाचा-भतीजा विवाद चर्चित रहा है। इसमें अब राजरत्न आंबेडकर का भी नाम जुड़ने वाला है। वे बहुजन वंचित आघाड़ी (बीवीए) के नेता प्रकाश आंबेडकर के भतीजे हैं और विधानसभा चुनाव में उनके लिए चुनौती बनेंगे। 30 सितंबर, 1956 डॉ. भीमराव आंबेडकर ने रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया का गठन किया था, जिसे राजरत्न आंबेडकर ने निर्वाचन आयोग में रजिस्टर्ड कराया है। राजरत्न आंबेडकर (42) डॉ. भीमराव आंबेडकर के भाई आनंदराज के बेटे अशोक आंबेडकर के पुत्र हैं। फाइनेंस मैनेजमेंट में पीएचडी राजरत्न आंबेडकर भारतीय बौद्ध महासभा के अध्यक्ष भी हैं। वह बीते दो साल से उत्तर प्रदेश में बहुजन मैत्री सम्मेलन के जरिए दलितों को एकजुट करने में जुटे हैं।





