नई दिल्ली/उज्जैन: उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में ‘वीआईपी दर्शन’ (VIP Darshan) की व्यवस्था को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि भगवान के दरबार में सभी भक्त समान हैं और वहां दर्शन के नाम पर किसी भी प्रकार का भेदभाव या वीआईपी कल्चर उचित नहीं है। जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंदिर प्रबंधन को फटकार लगाते हुए पूछा कि आम श्रद्धालुओं की सुविधा की कीमत पर कुछ खास लोगों को प्राथमिकता क्यों दी जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणियां
अदालत ने दर्शन की व्यवस्था में सुधार लाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कई गंभीर सवाल उठाए:
- समानता का अधिकार: कोर्ट ने कहा, “ईश्वर के सामने कोई वीआईपी नहीं होता। आम आदमी को घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ता है, जबकि प्रभावशाली लोग कुछ ही मिनटों में गर्भ गृह तक पहुँच जाते हैं। यह व्यवस्था भक्तों की आस्था को ठेस पहुँचाती है।”
- प्रबंधन पर सवाल: कोर्ट ने मंदिर प्रशासन से पूछा कि क्या उन्होंने आम श्रद्धालुओं के लिए सुगम दर्शन सुनिश्चित करने के लिए कोई ठोस योजना बनाई है।
- भस्म आरती और रसीद: अदालत ने दर्शन के लिए ली जाने वाली अतिरिक्त शुल्क और वीआईपी रसीदों के वितरण की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े किए।
क्या है पूरा विवाद?
महाकाल मंदिर में दर्शन व्यवस्था को लेकर विवाद काफी समय से चल रहा है, जिसने अब कानूनी रूप ले लिया है:
- पेड दर्शन की व्यवस्था: मंदिर में 250 रुपये या अन्य शुल्क देकर ‘शीघ्र दर्शन’ की व्यवस्था है। आरोप है कि इसके कारण उन श्रद्धालुओं को भारी परेशानी होती है जो बिना शुल्क दिए घंटों कतार में लगे रहते हैं।
- गर्भगृह में प्रवेश: अक्सर बड़े नेताओं, नौकरशाहों और मशहूर हस्तियों को नियमों में ढील देकर सीधे गर्भगृह तक ले जाया जाता है, जिससे आम भक्तों का समय और बढ़ जाता है।
- सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन: याचिकाकर्ता का तर्क है कि वीआईपी मूवमेंट की वजह से मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है और भगदड़ जैसी स्थिति बनने का खतरा रहता है।
मंदिर की सुरक्षा और शिवलिंग संरक्षण पर भी चिंता
सुप्रीम कोर्ट केवल दर्शन व्यवस्था ही नहीं, बल्कि महाकाल शिवलिंग के क्षरण (Erosion) को लेकर भी चिंतित है।
- कोर्ट ने विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर निर्देश दिया है कि शिवलिंग पर शुद्ध पंचामृत और आरओ (RO) जल का ही प्रयोग किया जाए ताकि उसकी प्राचीनता बनी रहे।
- भस्म आरती के दौरान भी राख और रसायनों के संपर्क को कम करने के लिए कड़े नियम लागू करने की बात कही गई है।
कोर्ट ने मंदिर समिति से माँगा शपथ पत्र
सुप्रीम कोर्ट ने महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति (MTMC) को निर्देश दिया है कि वे एक विस्तृत शपथ पत्र दाखिल करें, जिसमें निम्नलिखित जानकारी दी जाए:
- वीआईपी दर्शन को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
- आम श्रद्धालुओं के लिए ‘वेटिंग टाइम’ कम करने की क्या योजना है?
- मंदिर परिसर में स्वच्छता और शिवलिंग के संरक्षण की वर्तमान स्थिति क्या है?
आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद अब मध्य प्रदेश सरकार और मंदिर प्रशासन पर दर्शन व्यवस्था में बड़े बदलाव करने का दबाव बढ़ गया है। जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में तिरुपति बालाजी की तर्ज पर महाकाल मंदिर में भी दर्शन के लिए स्लॉट-आधारित आधुनिक तकनीक अपनाई जा सकती है ताकि वीआईपी और आम भक्तों के बीच की दूरी कम हो सके।





