नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गोवा के मर्मुगाओ पोर्ट प्राधिकरण की भूमि पर स्थापित छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा को हटाने के बंबई हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने याचिका पर हस्तक्षेप से इंकार करते हुए हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा।
याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें मर्मुगाओ पोर्ट प्राधिकरण की जमीन से प्रतिमा हटाने के लिए राज्य प्रशासन को आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट की अवकाशकालीन पीठ ने मामले में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं मानते हुए याचिका खारिज कर दी।
इससे पहले बंबई हाई कोर्ट की गोवा पीठ ने कहा था कि प्रतिमा का निर्माण और स्थापना पोर्ट प्राधिकरण की भूमि पर बिना अनुमति की गई थी। अदालत ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को निर्देश दिया था कि प्रतिमा हटाने की प्रक्रिया के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
मर्मुगाओ पोर्ट प्राधिकरण का कहना था कि उसकी भूमि पर अतिक्रमण कर प्रतिमा स्थापित की गई, जबकि स्थानीय लोगों और कुछ जनप्रतिनिधियों ने इसे सांस्कृतिक आस्था और सम्मान का प्रतीक बताते हुए हटाने का विरोध किया था। हालांकि, न्यायालय ने भूमि स्वामित्व और कानूनी प्रक्रिया को प्राथमिकता देते हुए प्रतिमा हटाने के आदेश को उचित माना।
सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद अब हाई कोर्ट के निर्देशानुसार प्रतिमा हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।





