मुंबई।
मराठा आरक्षण को लेकर चल रहा बहुचर्चित आंदोलन आखिरकार शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हो गया। आंदोलन की शुरुआत भूख हड़ताल से हुई थी और धीरे-धीरे यह सड़कों तक पहुंचा, लेकिन पुलिस के संयम और कोर्ट के हस्तक्षेप से स्थिति बेकाबू नहीं हुई।
पिछले कई दिनों से राज्य के अलग-अलग हिस्सों में मराठा समाज के लोग आरक्षण की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे थे। प्रदर्शनकारियों ने जगह-जगह धरना-प्रदर्शन किए और कई बार सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश भी की। आंदोलन की अगुआई करने वाले नेताओं ने भूख हड़ताल शुरू कर सरकार को चेताया था कि उनकी मांगों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इस बीच, अदालत ने भी मामले का संज्ञान लिया और प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के सख्त निर्देश दिए। पुलिस ने संयम दिखाते हुए भीड़ को नियंत्रित रखा और किसी भी तरह की हिंसा को रोकने में सफलता हासिल की। यही कारण रहा कि आंदोलन बड़े पैमाने पर फैलने के बावजूद बेकाबू नहीं हुआ।
अंततः आंदोलनकारियों ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने का ऐलान किया और प्रदर्शन खत्म कर दिया। सरकार की ओर से यह भरोसा दिया गया कि मराठा समाज की मांगों पर गंभीरता से विचार होगा।
राजनीतिक गलियारों में इस आंदोलन ने गहरी हलचल मचाई। विपक्षी दलों ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया, जबकि सत्तापक्ष का कहना है कि संवेदनशील मुद्दे को सुलझाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।





