वाशिंगटन/अबू धाबी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) को एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलता मिली है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने इस प्रतिष्ठित शांति परिषद में शामिल होने का ट्रंप का न्योता स्वीकार कर लिया है। व्हाइट हाउस ने इस विकास की पुष्टि करते हुए इसे ‘अब्राहम एकॉर्ड’ के अगले चरण के रूप में वर्णित किया है। यह परिषद मुख्य रूप से मध्य पूर्व में चल रहे संघर्षों को समाप्त करने, आर्थिक सहयोग बढ़ाने और कट्टरपंथ के खिलाफ एक साझा मंच तैयार करने पर काम करेगी। यूएई की भागीदारी को इस पहल के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अबू धाबी की अरब जगत और पश्चिमी देशों, दोनों के साथ मजबूत कूटनीतिक पकड़ है।
‘बोर्ड ऑफ पीस’ क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा परिकल्पित यह बोर्ड एक उच्च-स्तरीय अंतरराष्ट्रीय सलाहकार निकाय होगा:
- शांति और स्थिरता: इसका प्राथमिक लक्ष्य गाजा, लेबनान और यमन जैसे संघर्ष क्षेत्रों में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए कूटनीतिक समाधान खोजना है।
- आर्थिक एकीकरण: यह बोर्ड इजरायल और अरब देशों के बीच व्यापार, तकनीक और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक सेतु के रूप में कार्य करेगा।
- सुरक्षा सहयोग: ईरान के बढ़ते प्रभाव और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए एक सामूहिक सुरक्षा ढांचा तैयार करना भी इसके एजेंडे में शामिल है।
शेख मोहम्मद बिन जायद की भूमिका क्यों है अहम?
यूएई के राष्ट्रपति का इस बोर्ड में शामिल होना कई मायनों में गेम-चेंजर साबित हो सकता है:
- अब्राहम एकॉर्ड के शिल्पकार: शेख मोहम्मद बिन जायद ने ही इजरायल के साथ ऐतिहासिक शांति समझौते की नींव रखी थी, ऐसे में उनका अनुभव इस नए बोर्ड के लिए अमूल्य होगा।
- क्षेत्रीय मध्यस्थ: यूएई वर्तमान में रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर क्षेत्रीय विवादों तक एक निष्पक्ष मध्यस्थ के रूप में उभरा है, जिससे बोर्ड की विश्वसनीयता बढ़ेगी।
- ट्रंप के साथ घनिष्ठ संबंध: राष्ट्रपति ट्रंप और शेख मोहम्मद के बीच व्यक्तिगत मित्रता और आपसी विश्वास इस पहल को तेजी से धरातल पर उतारने में सहायक होगा।
वैश्विक प्रतिक्रियाएं और रणनीतिक महत्व
इस घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं:
- इजरायल का स्वागत: इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस कदम का स्वागत करते हुए इसे “क्षेत्रीय शांति के लिए एक नया सवेरा” बताया है।
- विशेषज्ञों की राय: कूटनीतिज्ञों का मानना है कि ट्रंप इस बोर्ड के जरिए एक ‘समानांतर कूटनीतिक चैनल’ तैयार कर रहे हैं, जो संयुक्त राष्ट्र (UN) जैसे पारंपरिक संस्थानों के बाहर तेजी से फैसले ले सकेगा।
- विपक्ष की नजर: अमेरिका में ट्रंप के राजनीतिक विरोधी इस पहल को उनकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का एक नया विस्तार मान रहे हैं, जो सीधे तौर पर अमेरिकी वैश्विक प्रभाव को पुनर्स्थापित करने की कोशिश है।
यूएई का ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होना यह दर्शाता है कि डोनाल्ड ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में मध्य पूर्व की राजनीति को पूरी तरह बदलने का इरादा रखते हैं। शेख मोहम्मद बिन जायद की भागीदारी न केवल इस बोर्ड को वित्तीय और कूटनीतिक मजबूती देगी, बल्कि अन्य अरब देशों के लिए भी इस शांति प्रक्रिया से जुड़ने के द्वार खोलेगी। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बोर्ड जमीनी स्तर पर चल रहे युद्धों को रोकने में कितना प्रभावी साबित होता है।





