नई दिल्ली: भारत और 27 देशों के समूह यूरोपीय संघ (EU) के बीच आज व्यापारिक दुनिया का सबसे बड़ा समझौता होने जा रहा है, जिसे विशेषज्ञों ने ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ (Mother of All Deals) का नाम दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के बीच होने वाली इस ऐतिहासिक शिखर वार्ता (16वें भारत-ईयू समिट) में मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर मुहर लग सकती है। करीब 18 सालों की लंबी बातचीत के बाद हो रहे इस समझौते से दोनों देशों के बीच 90% से अधिक वस्तुओं पर आयात शुल्क (Import Duty) या तो खत्म हो जाएगा या काफी कम कर दिया जाएगा।
आम आदमी की जेब पर क्या होगा असर?
इस समझौते के लागू होने के बाद यूरोपीय देशों से आने वाले कई प्रीमियम और लग्जरी उत्पाद भारतीय बाजार में काफी सस्ते हो जाएंगे। यहाँ उन प्रमुख चीजों की लिस्ट दी गई है जिनकी कीमतों में बड़ी गिरावट आने की संभावना है:
| उत्पाद श्रेणी | क्या होगा बदलाव? |
| यूरोपीय कारें (Luxury Cars) | BMW, मर्सिडीज, ऑडी और वोक्सवैगन जैसी कारों पर ड्यूटी 110% से घटकर 40% तक आ सकती है। |
| वाइन और स्पिरिट्स | फ्रांस और इटली से आने वाली वाइन और स्कॉच व्हिस्की पर लगने वाला भारी टैक्स काफी कम होगा। |
| चॉकलेट और डेयरी उत्पाद | बेल्जियम और स्विट्जरलैंड की चॉकलेट, साथ ही यूरोपीय चीज (Cheese) के दाम गिरेंगे। |
| मशीनरी और उपकरण | फैक्ट्रियों में इस्तेमाल होने वाली हाई-टेक यूरोपीय मशीनरी और मेडिकल डिवाइस सस्ते होंगे। |
| मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स | यूरोप में डिजाइन और असेंबल होने वाले प्रीमियम गैजेट्स की कीमतों में कमी आएगी। |
इन चीजों पर भी पड़ेगा सकारात्मक प्रभाव
- एग्रो प्रोडक्ट्स: जैतून का तेल (Olive Oil) और यूरोप के विशेष फल भारतीय ग्राहकों के लिए अधिक किफायती होंगे।
- टेक्सटाइल और फुटवियर: भारत से कपड़े और जूते-चप्पल का निर्यात बढ़ेगा, जिससे देश में उत्पादन बढ़ने पर स्थानीय कीमतें भी स्थिर रह सकती हैं।
इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) पर ‘वेटिंग पीरियड’
हालांकि लग्जरी कारों पर ड्यूटी तुरंत कम होगी, लेकिन इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के मामले में भारत ने सावधानी बरती है। घरेलू कंपनियों (जैसे टाटा और महिंद्रा) के हितों की रक्षा के लिए शुरुआती 5 वर्षों तक यूरोपीय ईवी पर टैक्स कटौती सीमित रह सकती है, जिसके बाद धीरे-धीरे शुल्क कम किया जाएगा।
भारत के लिए क्यों है यह ‘महा-समझौता’?
- निर्यात को पंख: भारत के कपड़ा, चमड़ा, रत्न-आभूषण और आईटी सेवाओं को 45 करोड़ की आबादी वाले यूरोपीय बाजार में बिना किसी बाधा के प्रवेश मिलेगा।
- चीन पर निर्भरता कम: यह डील सप्लाई चेन के मामले में चीन पर निर्भरता कम करने और भारत को एक ‘ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब’ बनाने में मदद करेगी।
- डॉलर की बचत: ईयू के साथ सीधा व्यापार बढ़ने से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा।
- रोजगार के अवसर: विशेषज्ञों का मानना है कि इस डील से भारत के श्रम-प्रधान क्षेत्रों (Labor Intensive Sectors) में लाखों नए रोजगार पैदा होंगे।
2007 से अब तक का सफर
इस समझौते के लिए बातचीत साल 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन कई संवेदनशील मुद्दों (जैसे शराब पर टैक्स और डेटा प्रोटेक्शन) के कारण 2013 में बातचीत रुक गई थी। मोदी सरकार ने 2021 में इसे दोबारा शुरू किया और अब 2026 में यह अपने निर्णायक मोड़ पर है।
“यह समझौता केवल व्यापार नहीं, बल्कि दो बड़े लोकतंत्रों के बीच विश्वास की नई इबारत है। इससे भारतीय उपभोक्ताओं को ग्लोबल क्वालिटी के उत्पाद कम दामों पर मिलेंगे।” — वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के सूत्र





