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म्यांमार ड्रोन ट्रेनिंग केस में छह यूक्रेनी नागरिकों को डिफॉल्ट जमानत, NIA की जांच जारी

नई दिल्ली। म्यांमार में जातीय सशस्त्र समूहों से जुड़े ड्रोन युद्ध प्रशिक्षण शिविर के मामले में दिल्ली की विशेष एनआईए अदालत ने छह यूक्रेनी नागरिकों को डिफॉल्ट जमानत दे दी है। विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने सभी आरोपितों को एक-एक लाख रुपये के बांड पर रिहा करने का आदेश दिया।

इन छहों को मार्च में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया था कि वे भारत और म्यांमार में सक्रिय जातीय सशस्त्र समूहों को ड्रोन युद्ध और सैन्य तकनीक से संबंधित प्रशिक्षण देने वाली गतिविधियों से जुड़े थे। मामले में अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक भी आरोपी हैं, जिन्हें 18 सितंबर को अदालत से डिफॉल्ट जमानत मिल चुकी है।

180 दिन की अवधि के बाद मिली राहत

अदालत ने छहों यूक्रेनी नागरिकों को वैन डाइक के मामले में दिए गए आदेश के आधार पर समानता का लाभ देते हुए डिफॉल्ट बेल दी। शुरुआती मामले में यूएपीए की धाराएं लगाई गई थीं और जांच के लिए 180 दिनों की अवधि का लाभ लिया गया था। हालांकि, सितंबर में दाखिल पहली चार्जशीट में एनआईए ने यूएपीए की धाराएं शामिल नहीं कीं और इमिग्रेशन एवं फॉरेनर्स एक्ट, 2025 के तहत आरोप लगाए। एनआईए ने स्पष्ट किया था कि यूएपीए से जुड़े पहलुओं की जांच जारी है।

इमिग्रेशन मामलों में भी राहत

अदालत ने छह आरोपितों को इमिग्रेशन एवं फॉरेनर्स एक्ट की धाराओं 21 और 23 के तहत लगे आरोपों से भी मुक्त कर दिया। इससे पहले विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) ने इन मामलों को कंपाउंड करते हुए प्रत्येक आरोपी पर 5.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।

हालांकि, जमानत मिलने का अर्थ यह नहीं है कि मामले की जांच समाप्त हो गई है। NIA ने कहा है कि यूएपीए से जुड़े आरोपों की जांच अभी जारी है और तथ्यों की पुष्टि के बाद आगे की कार्रवाई या पूरक चार्जशीट दाखिल की जा सकती है।

इस आदेश के साथ मामले में गिरफ्तार सभी सात विदेशी नागरिकों को फिलहाल जमानत मिल चुकी है। कोर्ट ने जमानत के साथ संबंधित शर्तें भी लागू की हैं।

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