नई दिल्ली/कोलकाता: भारत और बांग्लादेश के बीच मधुर संबंधों और मानवीय आधार पर एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए दोनों देशों ने एक-दूसरे के नागरिकों को स्वदेश वापस भेजा है। बांग्लादेश सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा (IMBL) पार करने के आरोप में पकड़े गए 23 भारतीय मछुआरों को रिहा कर भारत को सौंप दिया है। जवाब में, भारत ने भी विभिन्न जेलों में सजा काट चुके या अवैध रूप से सीमा पार करने वाले 128 बांग्लादेशी नागरिकों को उनके देश वापस भेज दिया है। इस द्विपक्षीय कार्रवाई को दक्षिण एशिया में सीमा प्रबंधन और मानवीय सहयोग की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
भारतीय मछुआरों की घर वापसी: भावुक हुए परिजन
रिहा किए गए 23 भारतीय मछुआरे मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना जिलों के रहने वाले हैं।
- क्यों हुए थे गिरफ्तार: ये मछुआरे कुछ महीने पहले मछली पकड़ने के दौरान अनजाने में समुद्री सीमा पार कर बांग्लादेशी जलक्षेत्र में चले गए थे, जिसके बाद वहां के कोस्ट गार्ड ने इन्हें हिरासत में ले लिया था।
- हस्तांतरण प्रक्रिया: बांग्लादेशी अधिकारियों ने इन मछुआरों को पेट्रापोल-बेनापोल एकीकृत चेक पोस्ट (ICP) पर भारतीय सीमा सुरक्षा बल (BSF) के हवाले किया। घर वापसी की खबर सुनते ही सीमाओं पर उनके परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू छलक आए।
भारत ने भी दिखाई दरियादिली: 128 बांग्लादेशी भेजे गए वतन
भारतीय विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय के समन्वय से 128 बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजने की प्रक्रिया पूरी की गई।
- सजा पूरी कर चुके लोग: इनमें से अधिकांश वे लोग थे जो पासपोर्ट नियमों के उल्लंघन या बिना वैध दस्तावेजों के प्रवेश के कारण भारतीय जेलों में बंद थे और अपनी सजा पूरी कर चुके थे।
- सुरक्षा घेरा: इन नागरिकों को अलग-अलग समूहों में कड़ी सुरक्षा के बीच सीमा तक लाया गया और कानूनी औपचारिकताओं के बाद बांग्लादेशी पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया।
बीजीबी और बीएसएफ के बीच समन्वय
इस पूरी प्रक्रिया को सफल बनाने में सीमा सुरक्षा बल (BSF) और बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश (BGB) के बीच उच्च स्तरीय संवाद ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- फ्लैग मीटिंग: प्रत्यर्पण से पहले दोनों देशों के सुरक्षा बलों के बीच फ्लैग मीटिंग आयोजित की गई, जिसमें दस्तावेजों का मिलान और पहचान की पुष्टि की गई।
- मानवीय दृष्टिकोण: दोनों देशों के अधिकारियों ने सहमति जताई कि अनजाने में सीमा पार करने वाले मछुआरों और सजा पूरी कर चुके कैदियों को लंबी कानूनी प्रक्रिया में उलझाने के बजाय मानवीय आधार पर जल्द रिहा किया जाना चाहिए।
रिश्तों में मजबूती का संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में नागरिकों का आदान-प्रदान यह दर्शाता है कि हालिया राजनीतिक बदलावों के बावजूद भारत और बांग्लादेश के बीच जमीनी स्तर पर प्रशासनिक सहयोग मजबूत बना हुआ है।
“यह ऑपरेशन दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास का प्रतीक है। हम निरंतर प्रयास कर रहे हैं कि उन मछुआरों को जल्द से जल्द वापस लाया जाए जो अब भी पड़ोसी देश की हिरासत में हैं। इस तरह के कदम द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊर्जा देते हैं।” — प्रवक्ता, भारतीय विदेश मंत्रालय





