विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच रचनात्मक वार्ता हुई जिसमें सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा, रक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। साथ ही व्यापार विस्तार, समुद्री सहयोग और लोगों के बीच संपर्क मजबूत करने पर भी चर्चा हुई।
जयशंकर ने बताया कि बैठक में न केवल व्यापार और विनिर्माण पर, बल्कि उभरती तकनीकों और स्वच्छ ऊर्जा में नए अवसर तलाशने पर भी विचार हुआ। दोनों नेताओं ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की परिस्थितियों और वैश्विक परिदृश्य पर भी विचार साझा किए।
इस वर्ष भारत-दक्षिण कोरिया की विशेष रणनीतिक साझेदारी के 10 साल पूरे हो रहे हैं। जयशंकर ने पहलगाम आतंकी हमले की कोरिया की ओर से की गई निंदा के लिए आभार जताया और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारतीय संसदीय दल को दिए गए सहयोग की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि पदभार ग्रहण करने के महज एक माह के भीतर ह्यून का भारत दौरा रिश्तों के महत्व को दर्शाता है।
ब्रिटिश विदेश मंत्री से यूक्रेन संकट पर बातचीत
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड लैमी से टेलीफोन पर वार्ता की। बातचीत में यूक्रेन संघर्ष, उससे जुड़े अंतरराष्ट्रीय प्रयासों और हाल ही में अमेरिका-रूस शिखर वार्ता पर चर्चा हुई। यह कॉल ब्रिटिश विदेश मंत्री की पहल पर हुआ।
जयशंकर ने सोशल मीडिया पर बताया कि यूक्रेन के हालिया घटनाक्रम के अलावा अन्य द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ। उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को अलास्का में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात हुई थी।





