नई दिल्ली (20 मार्च, 2026): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को थाईलैंड के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविराकुल को उनके पदभार ग्रहण करने पर हार्दिक बधाई दी। पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि अनुतिन के नेतृत्व में भारत और थाईलैंड के द्विपक्षीय संबंध एक नए युग में प्रवेश करेंगे। दोनों नेताओं के बीच इस संवाद से यह स्पष्ट हो गया है कि दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति (Act East Policy) के तहत थाईलैंड एक अत्यंत महत्वपूर्ण भागीदार बना रहेगा।
साझा विरासत पर जोर: सभ्यता और संस्कृति का बंधन
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से अपनी शुभकामनाएं साझा करते हुए दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों को रेखांकित किया:
- गहरे सांस्कृतिक संबंध: पीएम मोदी ने कहा कि भारत और थाईलैंड के रिश्ते केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि साझा सभ्यता, धर्म और संस्कृति की मजबूत नींव पर टिके हैं।
- जन-जन का जुड़ाव: उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के लोगों के बीच सदियों पुराने और अटूट संबंध हैं, जो आपसी विश्वास और सम्मान को दर्शाते हैं
रणनीतिक साझेदारी: शांति और समृद्धि का साझा लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि आगामी वर्षों में बैंकॉक और नई दिल्ली के बीच रणनीतिक सहयोग और अधिक गहरा होगा:
- साझा विजन: पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देश दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में शांति, प्रगति और वैश्विक समृद्धि के साझा लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एकजुट होकर काम करने को प्रतिबद्ध हैं।
- आर्थिक और सुरक्षा सहयोग: माना जा रहा है कि नई सरकार के साथ भारत समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और ‘भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग’ जैसे बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर गति तेज करेगा।
थाईलैंड में सत्ता परिवर्तन और भारत का महत्व
अनुतिन चर्नविराकुल का प्रधानमंत्री चुना जाना थाईलैंड की राजनीति में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। भारत के लिए थाईलैंड आसियान (ASEAN) देशों के बीच एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार है।
- पर्यटन और व्यापार: हर साल लाखों भारतीय पर्यटक थाईलैंड जाते हैं, और दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। पीएम मोदी की यह पहल इस आर्थिक मजबूती को बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम है।





