नई दिल्ली/बीजिंग: भारत और चीन के बीच लंबे समय से जारी गतिरोध को खत्म करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। दोनों देशों के वरिष्ठ राजनयिकों और अधिकारियों के बीच हुई हालिया बैठक में व्यापार से जुड़ी गंभीर चिंताओं और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति बहाली को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। भारत ने स्पष्ट किया है कि जब तक सीमावर्ती इलाकों में पूरी तरह शांति और स्थिरता बहाल नहीं होती, तब तक द्विपक्षीय संबंधों का सामान्य होना कठिन है। साथ ही, भारत ने चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे (Trade Deficit) को लेकर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।
व्यापारिक चिंताएं: असंतुलित व्यापार पर भारत का कड़ा रुख
आर्थिक मोर्चे पर भारत ने चीनी पक्ष के सामने अपनी चिंताओं को प्रमुखता से रखा:
- बढ़ता व्यापार घाटा: भारत ने इस बात पर जोर दिया कि चीन के साथ व्यापारिक संतुलन एकतरफा होता जा रहा है। चीनी सामानों की भारतीय बाजार में अधिकता और भारतीय उत्पादों (विशेषकर फार्मा और कृषि) के लिए चीनी बाजार में सीमित पहुंच मुख्य चिंता का विषय है।
- बाजार पहुंच (Market Access): भारतीय अधिकारियों ने मांग की है कि चीन अपने बाजार की बाधाओं को दूर करे ताकि भारतीय आईटी और सेवा क्षेत्र वहां प्रतिस्पर्धा कर सकें।
- सप्लाई चेन पर निर्भरता: चर्चा में यह बात भी उठी कि महत्वपूर्ण कच्चे माल के लिए चीन पर अत्यधिक निर्भरता को कम करना भारत की आर्थिक सुरक्षा के लिए जरूरी है।
सीमा विवाद: ‘शांति ही विकास की पहली शर्त’
सीमावर्ती इलाकों में तनाव कम करने के लिए दोनों पक्षों ने ‘डिसइंगेजमेंट’ (सैनिकों की वापसी) प्रक्रिया की समीक्षा की:
- बफर जोन और गश्त: पूर्वी लद्दाख के शेष विवादित क्षेत्रों से सैनिकों को पूरी तरह पीछे हटाने और गश्त के अधिकारों को बहाल करने पर सहमति बनाने की कोशिश की गई।
- विश्वास बहाली के उपाय (CBMs): दोनों सेनाओं के बीच जमीनी स्तर पर टकराव को रोकने के लिए ‘हॉटलाइन’ और नियमित फ्लैग मीटिंग्स को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।
- द्विपक्षीय समझौतों का सम्मान: भारत ने दोहराया कि 1993 और 1996 के सीमा समझौतों का अक्षरशः पालन ही सीमा पर शांति का एकमात्र रास्ता है।
राजनयिक संदेश: संबंधों में ‘सामान्य स्थिति’ की तलाश
बैठक के दौरान वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी चर्चा हुई:
- शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व: दोनों पक्षों ने स्वीकार किया कि एशिया की दो सबसे बड़ी शक्तियों के बीच तनाव का असर पूरे वैश्विक भू-राजनीति पर पड़ता है।
- संवाद की निरंतरता: दोनों देशों ने सैन्य और राजनयिक स्तर (WMCC) पर बातचीत का सिलसिला जारी रखने का निर्णय लिया है ताकि मतभेदों को विवाद में बदलने से रोका जा सके।





