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भारत को वैश्विक मध्यस्थता केंद्र बनने से कोई नहीं रोक सकता : सीजेआई सूर्यकांत

नई दिल्ली। भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा है कि भारत में वैश्विक मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) का प्रमुख केंद्र बनने की पूरी क्षमता है। उन्होंने कहा कि देश के पास मजबूत कानूनी व्यवस्था, प्रतिभाशाली पेशेवर और आवश्यक संस्थागत आधार मौजूद हैं। जरूरत इन संसाधनों को प्रभावी ढंग से विकसित करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर का भरोसा कायम करने की है।

सीजेआई ने कहा कि ऐसा कोई कारण नहीं है कि भारत वैश्विक मध्यस्थता केंद्र न बन सके। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक विवादों के त्वरित और प्रभावी समाधान के लिए मध्यस्थता की भूमिका लगातार बढ़ रही है। भारत इस क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है और वैश्विक कंपनियों के लिए भरोसेमंद विकल्प बन सकता है।

मजबूत संस्थानों और भरोसे पर जोर

सीजेआई ने इस दिशा में मजबूत संस्थानों, प्रक्रियाओं में निरंतरता और समयबद्ध विवाद निपटारे को महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि वैश्विक मध्यस्थता केंद्र केवल कानून और बुनियादी ढांचे से नहीं बनते, बल्कि उनकी सफलता का आधार संस्थागत विश्वसनीयता और न्यायिक समर्थन भी होता है।

भारत में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता को बढ़ावा देने के लिए पहले भी कई संस्थागत और कानूनी कदम उठाए गए हैं। सरकार ने नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र की स्थापना सहित संस्थागत मध्यस्थता को बढ़ावा देने की पहल की है। इसका उद्देश्य घरेलू और अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक विवादों के त्वरित समाधान के लिए पेशेवर व्यवस्था विकसित करना है।

आर्थिक गतिविधियों में भी मिलेगी मदद

मध्यस्थता के क्षेत्र में भारत की मजबूत स्थिति से कारोबार और विदेशी निवेश को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के अनुसार, विवादों के त्वरित समाधान की विश्वसनीय व्यवस्था से कारोबारियों में भरोसा बढ़ता है और देश की कारोबारी साख मजबूत होती है।

सीजेआई का बयान ऐसे समय आया है जब भारत को अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश के लिए प्रमुख केंद्र बनाने के साथ-साथ विवाद समाधान की वैश्विक व्यवस्था में भी देश की भूमिका बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। 

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