नई दिल्ली। भारत की वायु रक्षा प्रणाली को बड़ा मजबूती मिलने जा रही है। रूस से खरीदे गए अत्याधुनिक S-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम की चौथी यूनिट अगले महीने भारत पहुंचने वाली है। यह प्रणाली भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी की हवाई सुरक्षा क्षमता को और सशक्त करेगी।
रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस ने चौथी S-400 यूनिट भारत के लिए रवाना कर दी है और इसके मई 2026 के मध्य तक भारतीय बंदरगाह पर पहुंचने की उम्मीद है। भारतीय वायुसेना की टीम पहले ही इस सिस्टम का प्री-डिस्पैच निरीक्षण पूरा कर चुकी है।
यह मिसाइल प्रणाली भारत-रूस के बीच वर्ष 2018 में हुए लगभग 5.4 अरब डॉलर के रक्षा समझौते के तहत खरीदी जा रही पांच S-400 यूनिट्स में से चौथी है। समझौते के बाद भारत चरणबद्ध तरीके से इन प्रणालियों को अपने सामरिक क्षेत्रों में तैनात कर रहा है।
सूत्रों के मुताबिक नई यूनिट को पश्चिमी सीमा क्षेत्र में तैनात किया जा सकता है, जिससे पाकिस्तान की दिशा से आने वाले संभावित हवाई खतरों के खिलाफ सुरक्षा और मजबूत होगी। S-400 सिस्टम लंबी दूरी तक दुश्मन के लड़ाकू विमान, ड्रोन, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइलों को ट्रैक कर उन्हें नष्ट करने में सक्षम माना जाता है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि S-400 की तैनाती से भारत की बहु-स्तरीय एयर डिफेंस शील्ड और प्रभावी हो रही है। हाल के सैन्य अभियानों में भी इस प्रणाली की उपयोगिता महत्वपूर्ण मानी गई है, जिसके बाद इसकी त्वरित डिलीवरी पर विशेष ध्यान दिया गया।
बताया जा रहा है कि पांचवीं और अंतिम S-400 यूनिट की आपूर्ति वर्ष 2026 के अंत तक पूरी होने की संभावना है। इसके बाद भारत का रणनीतिक एयर डिफेंस नेटवर्क चीन और पाकिस्तान दोनों मोर्चों पर अधिक सुदृढ़ स्थिति में होगा।
रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, बदलते वैश्विक सुरक्षा वातावरण और बढ़ते ड्रोन व मिसाइल खतरों के बीच S-400 प्रणाली भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का अहम स्तंभ बनती जा रही है।





