वॉशिंगटन/नई दिल्ली: भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदे जाने पर लगाए गए 25 प्रतिशत के अतिरिक्त टैरिफ (आयात शुल्क) को तत्काल प्रभाव से हटाने का एलान कर दिया है। अमेरिका के इस फैसले को भारत की सफल विदेश नीति और हालिया ‘भारत-अमेरिका ट्रेड डील’ के सकारात्मक परिणाम के रूप में देखा जा रहा है। इस कदम से न केवल भारत का रूस से तेल आयात करना सस्ता हो जाएगा, बल्कि घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी बड़ी गिरावट आने की संभावना प्रबल हो गई है।
ट्रंप के इस फैसले के पीछे की बड़ी वजह
विशेषज्ञों के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप का यह फैसला उनकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति और भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को संतुलित करने का हिस्सा है:
- भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: हाल ही में हुए द्विपक्षीय व्यापार समझौते के तहत भारत ने अमेरिका से बड़ी मात्रा में कृषि और तकनीकी उत्पादों के आयात पर सहमति जताई थी। बदले में, अमेरिका ने भारत की ऊर्जा जरूरतों को समझते हुए रूस से तेल खरीद पर लगे कड़े प्रतिबंधों और टैरिफ में ढील दी है।
- सप्लाई चेन की स्थिरता: अमेरिका का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए भारत जैसे बड़े उपभोक्ता देश को किफायती तेल मिलना जरूरी है।
भारत को होने वाले 3 सबसे बड़े फायदे
- सस्ता कच्चा तेल: 25% टैरिफ हटने से भारतीय तेल रिफाइनिंग कंपनियों (जैसे IOC, HPCL) की लागत में भारी कमी आएगी। रूस से मिलने वाला डिस्काउंटेड तेल अब भारत के लिए पहले से कहीं अधिक लाभदायक होगा।
- महंगाई पर लगाम: कच्चे तेल के दाम कम होने का सीधा असर माल ढुलाई और परिवहन लागत पर पड़ेगा, जिससे आम आदमी को महंगाई से बड़ी राहत मिल सकती है।
- विदेशी मुद्रा भंडार की बचत: सस्ते तेल के आयात से भारत के व्यापार घाटे (Trade Deficit) में कमी आएगी और देश का कीमती विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित रहेगा।
कूटनीतिक संतुलन और ग्लोबल संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच की केमिस्ट्री ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता किए बिना रूस और अमेरिका, दोनों के साथ बेहतर संबंध बनाए रखने में सक्षम है।
- रूस के साथ संबंध: यह फैसला रूस के लिए भी अच्छी खबर है क्योंकि भारत उसका सबसे बड़ा तेल खरीदार बना रहेगा।
- चीन के लिए संदेश: अमेरिका का भारत को यह विशेष रियायत देना यह दर्शाता है कि वह एशिया में चीन के मुकाबले भारत को एक मजबूत आर्थिक शक्ति के रूप में देखना चाहता है।





