नई दिल्ली (21 मार्च, 2026): पश्चिम एशिया में जारी भीषण और विनाशकारी संघर्ष के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल करते हुए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ टेलीफोन पर बातचीत की। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और इजराइल के हवाई हमलों से पूरा क्षेत्र दहक रहा है और तेल व गैस की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बातचीत में क्षेत्र में अहम बुनियादी ढांचे पर हो रहे हमलों की कड़ा शब्दों में निंदा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे हमले न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डालते हैं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ी चुनौती हैं।
पीएम मोदी का रुख: बुनियादी ढांचे पर हमले कतई स्वीकार्य नहीं
प्रधानमंत्री मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियन के साथ अपनी बातचीत में भारत के सख्त और स्पष्ट रुख को दोहराया:
- निंदा और चिंता: पीएम मोदी ने संघर्ष के दौरान नागरिक और आर्थिक बुनियादी ढांचे (जैसे तेल रिफाइनरियां, बंदरगाह, बिजली संयंत्र) पर हो रहे हमलों की निंदा की। उन्होंने कहा कि ऐसे हमले युद्ध के अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन हैं और इनसे आम जनता को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
- क्षेत्रीय स्थिरता: प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि ऐसे हमलों से पूरा क्षेत्र अस्थिर हो सकता है, जिससे तीसरे विश्व युद्ध की आहट बढ़ सकती है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समस्या का समाधान निकालने की अपील की।
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर चिंता
भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मिडिल ईस्ट पर बहुत हद तक निर्भर है, इस संघर्ष से सीधे तौर पर प्रभावित हो रहा है:
- वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं: पीएम मोदी ने चेतावनी दी कि बुनियादी ढांचे पर हमलों से तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं बाधित हो सकती हैं, जिससे दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहराने की आशंका बढ़ जाएगी। यह भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
- समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता: प्रधानमंत्री ने समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता बनाए रखने और शिपिंग मार्गों को खुला व सुरक्षित रखने के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर किसी भी तरह की रुकावट वैश्विक व्यापार के लिए विनाशकारी होगी।
भारत-ईरान संबंध और कूटनीतिक पहल
पीएम मोदी की यह कूटनीतिक पहल भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक और मजबूत संबंधों को दर्शाती है:
- रणनीतिक साझेदारी: भारत और ईरान के बीच ऊर्जा, कनेक्टिविटी (जैसे चाबहार बंदरगाह) और आतंकवाद विरोधी सहयोग जैसे क्षेत्रों में एक रणनीतिक साझेदारी है। यह बातचीत इन संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
- शांति की अपील: भारत, जो एक ‘विश्वगुरु’ के रूप में अपनी भूमिका देख रहा है, इस संघर्ष में एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ हो सकता है। पीएम मोदी ने शांति की अपील करके और सभी पक्षों को बातचीत के लिए प्रोत्साहित करके भारत की शांतिप्रिय और जिम्मेदार कूटनीति का परिचय दिया है।





