नई दिल्ली/वॉशिंगटन: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में संपन्न हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते ने दोनों देशों के आर्थिक संबंधों की नई रूपरेखा तैयार कर दी है। इस सौदे की सबसे बड़ी विशेषता कई रणनीतिक वस्तुओं पर ‘जीरो टैरिफ’ (शून्य आयात शुल्क) का प्रावधान है। इस फैसले से न केवल भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में सीधी और सस्ती पहुंच मिलेगी, बल्कि भारतीय उपभोक्ताओं के लिए उच्च गुणवत्ता वाली अमेरिकी तकनीक और उत्पाद भी किफायती हो जाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी प्रशासन ने इसे “साझा समृद्धि का ब्लूप्रिंट” करार दिया है।
इन प्रमुख चीजों पर रहेगा ‘जीरो टैरिफ’: किसे क्या मिला?
समझौते के तहत दोनों देशों ने एक लंबी सूची तैयार की है, जिन पर अब कोई सीमा शुल्क (Customs Duty) नहीं लगेगा:
- भारत से अमेरिका जाने वाली वस्तुएं (निर्यात):
- फार्मा उत्पाद: भारतीय जेनेरिक दवाओं और सक्रिय दवा सामग्री (API) पर टैरिफ खत्म होने से भारत का फार्मा सेक्टर अमेरिका में और मजबूत होगा।
- हस्तशिल्प और टेक्सटाइल: भारतीय पारंपरिक हस्तशिल्प, कालीन और तैयार कपड़ों पर शुल्क हटने से बुनकरों और कारीगरों को बड़ा फायदा मिलेगा।
- कृषि उत्पाद: बासमती चावल, प्रसंस्कृत फल और समुद्री उत्पादों (सीफूड) को अब अमेरिकी बाजारों में बिना किसी अतिरिक्त कर के बेचा जा सकेगा।
- अमेरिका से भारत आने वाली वस्तुएं (आयात):
- सेमीकंडक्टर और हाई-टेक मशीनरी: चिप निर्माण के उपकरण और उन्नत मशीनों पर जीरो टैरिफ से भारत के ‘सेमीकंडक्टर मिशन’ को गति मिलेगी।
- नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण: सोलर पैनल के कंपोनेंट्स और विंड टर्बाइन तकनीक अब भारत में सस्ती उपलब्ध होगी।
- बादाम और अखरोट: अमेरिकी कृषि उत्पादों, विशेष रूप से बादाम और सेब पर लंबे समय से चले आ रहे उच्च शुल्क को समाप्त कर दिया गया है।
ट्रेड डील की 5 बड़ी बातें: जो आपको जाननी चाहिए
- बाजार पहुंच (Market Access): दोनों देशों ने एक-दूसरे के मानकों को मान्यता देने पर सहमति जताई है, जिससे उत्पादों की टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन में लगने वाला समय और खर्च कम होगा।
- डिजिटल ट्रेड: डेटा प्रवाह और ई-कॉमर्स को लेकर सरल नियम बनाए गए हैं, जिससे भारत के आईटी प्रोफेशनल्स और स्टार्टअप्स के लिए अमेरिका में काम करना आसान होगा।
- रक्षा और एयरोस्पेस: महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों के कलपुर्जों पर शुल्क कम होने से भारत में ‘डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग’ को बढ़ावा मिलेगा।
- सप्लाई चेन लचीलापन: चीन पर निर्भरता कम करने के लिए दोनों देश एक वैकल्पिक और भरोसेमंद सप्लाई चेन बनाने पर सहमत हुए हैं।
- विवाद निपटान: डब्ल्यूटीओ (WTO) में चल रहे कई पुराने व्यापारिक विवादों को इस डील के तहत आपसी सहमति से सुलझा लिया गया है।
अर्थव्यवस्था पर प्रभाव: विशेषज्ञों की राय
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि ‘जीरो टैरिफ’ व्यवस्था से द्विपक्षीय व्यापार अगले तीन वर्षों में 500 अरब डॉलर के आंकड़े को छू सकता है। विशेष रूप से भारत के छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) के लिए यह वैश्विक ब्रांड बनने का सुनहरा अवसर है।





