नई दिल्ली: भारत अपनी रक्षा तैयारियों को अभेद्य बनाने के लिए दुनिया की सबसे घातक मिसाइल प्रणालियों को अपने तरकश में शामिल करने जा रहा है। रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने एक हाई-प्रोफाइल बैठक में राफेल लड़ाकू विमानों के लिए फ्रांसीसी ‘स्कैल्प’ (SCALP) क्रूज मिसाइलों और रूस से S-400 वायु रक्षा प्रणाली की अतिरिक्त यूनिट्स की खरीद को हरी झंडी दे दी है। इन हथियारों का सामरिक महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि इन्हें भविष्य के संभावित ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का हिस्सा माना जा रहा है। इस कदम से भारत की सीमा पार हमला करने की शक्ति और हवाई सुरक्षा दोनों में क्रांतिकारी बदलाव आएगा।
SCALP मिसाइल: राफेल को मिलेगी ‘लॉन्ग रेंज’ मारक शक्ति
फ्रांस से आने वाली स्कैल्प मिसाइलें भारतीय वायुसेना के राफेल विमानों की ताकत को कई गुना बढ़ा देंगी:
- सटीक निशाना: यह एक ‘दागो और भूल जाओ’ (Fire and Forget) श्रेणी की लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल है, जो दुश्मन के ठिकानों को 300 से 500 किलोमीटर की दूरी से भी ध्वस्त कर सकती है।
- बंकर ब्लास्टर: यह मिसाइल जमीन के काफी नीचे बने बंकरों और कमांड सेंटर को भेदने में सक्षम है, जिससे युद्ध की स्थिति में दुश्मन के संचार तंत्र को पल भर में नष्ट किया जा सकेगा।
- रडार से बचाव: इसकी ‘स्टील्थ’ तकनीक इसे दुश्मन के रडार की नजरों से बचकर लक्ष्य तक पहुँचने में मदद करती है।
S-400 का सुरक्षा चक्र: चीन और पाकिस्तान की हर चाल होगी नाकाम
रूस के साथ होने वाले इस सौदे के तहत भारत अपने एयर डिफेंस सिस्टम को और मजबूत करेगा:
- एक साथ कई निशाने: S-400 सिस्टम एक साथ 36 लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है और उन्हें नष्ट करने की क्षमता रखता है।
- मिसाइल और एयरक्राफ्ट किलर: यह दुनिया का सबसे उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम माना जाता है, जो दुश्मन के लड़ाकू विमानों, बैलिस्टिक मिसाइलों और यहां तक कि ड्रोन्स को 400 किमी की रेंज में मार गिराता है।
- अभेद सुरक्षा: इसे लद्दाख और अरुणाचल जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा, जिससे भारत का हवाई क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगा।
क्या है ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और इसके मायने?
सुरक्षा गलियारों में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की चर्चा ने इस खरीद को और भी अहम बना दिया है:
- सामरिक योजना: माना जा रहा है कि यह ऑपरेशन भारत की सीमाओं पर बढ़ते दबाव और हिंद महासागर क्षेत्र में प्रतिद्वंद्वियों की बढ़ती सक्रियता का जवाब देने के लिए तैयार की गई एक व्यापक रणनीति है।
- शक्ति संतुलन: इन मिसाइलों के आने से दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन भारत के पक्ष में झुक जाएगा, जिससे किसी भी संभावित घुसपैठ या हमले का जवाब देना आसान होगा।
रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) का फैसला: आत्मनिर्भरता के साथ तकनीक
रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि भारत आधुनिक तकनीक के लिए विदेशी सौदे तो कर रहा है, लेकिन इनमें ‘मेक इन इंडिया’ के तहत रखरखाव और तकनीक हस्तांतरण के पहलुओं को भी शामिल किया गया है।





