नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने प्रदूषण मुक्त परिवहन की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनों के संचालन की तैयारी तेज कर दी है। रेलवे बोर्ड ने देश के 5 प्रमुख रूटों का चयन किया है, जहाँ इन आधुनिक ट्रेनों का परिचालन किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का पहला ट्रायल जून 2026 तक शुरू होने की उम्मीद है, जो भारत को वैश्विक स्तर पर उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर देगा जो इस स्वच्छ ऊर्जा तकनीक का उपयोग कर रहे हैं।
हाइड्रोजन ट्रेनों के लिए चयनित 5 प्रमुख रूट
रेलवे ने शुरुआती चरण के लिए उन रूटों को प्राथमिकता दी है जो भौगोलिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं:
- कालका-शिमला रेलवे: इस ऐतिहासिक और यूनेस्को विश्व धरोहर रूट पर सबसे पहले हाइड्रोजन ट्रेन चलाने की योजना है।
- दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे: पश्चिम बंगाल के इस प्रसिद्ध पहाड़ी मार्ग को भी इस इको-फ्रेंडली तकनीक से जोड़ा जाएगा।
- नीलगिरी माउंटेन रेलवे: तमिलनाडु के ऊटी रूट पर चलने वाली ट्रेनों को अब हाइड्रोजन फ्यूल सेल से शक्ति मिलेगी।
- माथेरान हिल रेलवे: महाराष्ट्र के इस खूबसूरत नैरो गेज रूट पर प्रदूषण कम करने के लिए हाइड्रोजन ट्रेनें दौड़ेंगी।
- कांगड़ा घाटी रेलवे: हिमाचल प्रदेश के पठानकोट-जोगिंदरनगर मार्ग पर भी इस सेवा का विस्तार किया जाएगा।
कैसे काम करती है हाइड्रोजन ट्रेन?
हाइड्रोजन ट्रेनें पारंपरिक डीजल इंजन वाली ट्रेनों से पूरी तरह अलग और पर्यावरण के अनुकूल होती हैं।
- शून्य उत्सर्जन (Zero Emission): ये ट्रेनें हाइड्रोजन फ्यूल सेल का उपयोग करती हैं, जहाँ हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच रासायनिक अभिक्रिया से बिजली पैदा होती है। इस प्रक्रिया में धुएं के बजाय केवल पानी और भाप उत्सर्जित होती है।
- कम शोर: ये ट्रेनें डीजल इंजनों की तुलना में बहुत कम शोर करती हैं, जिससे पहाड़ी और शांत क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण कम होगा।
- स्वदेशी तकनीक: इन ट्रेनों का निर्माण ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत किया जा रहा है, जिसमें भारतीय इंजीनियरों द्वारा विकसित हाइड्रोजन प्रोपल्शन सिस्टम का उपयोग होगा।
जून 2026: एक ऐतिहासिक मील का पत्थर
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, हाइड्रोजन ट्रेन का पहला प्रोटोटाइप दिसंबर 2025 तक तैयार होने की संभावना है, जिसके बाद सुरक्षा जांच और परीक्षणों का दौर शुरू होगा।
“हमारा लक्ष्य जून 2026 तक पहला सफल ट्रायल पूरा करना है। यह न केवल कार्बन उत्सर्जन को कम करने के हमारे ‘नेट जीरो’ लक्ष्य में मदद करेगा, बल्कि पर्यटन के अनुभव को भी और अधिक सुखद बनाएगा।” — वरिष्ठ रेलवे अधिकारी





